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हाईकोर्ट के फैसले से कट हुआ युवाओं का रोजगार
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
Updated Wed, 22 Jul 2015 11:28 AM IST
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नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में उपनल के माध्यम से संविदा कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को नियत करते हुए अदालत उपनल के प्रबंध निदेशक को हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी संघ देहरादून ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि यूजेवीएनएल, पीटीसीयूएल और यूपीसीएल तीनों ऊर्जा निगमों में उपनल के माध्यम से संविदा कर्मचारी नियुक्त हैं।
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याची का कहना था कि इन निगमों में सीधी भर्ती की प्रक्रिया अपनाई जा रही है जबकि संविदा कर्मचारियों का मुकदमा लेबर कोर्ट में लंबित है। याचिका में यह भी कहा गया था कि उपनल पूर्व सैनिकों की पुनर्नियुक्ति के लिए गठित है लेकिन सरकार ने उसे सेवायोजन कार्यालय बना दिया है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश पारित कर उपनल के माध्यम से सरकारी विभागों में संविदा कर्मचारी की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने 3 अगस्त की तिथि नियत करते हुए प्रबंध निदेशक उपनल को हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
सियासी दखल से पूर्वसैनिकों के रोजगार पर लगा कट
उच्च न्यायालय के फैसले से सरकार को कड़ा झटका लगा है। अभी तक उपनल केमाध्यम से चेहरे देखकर सरकारी विभागों में एडजस्ट करना भारी पड़ेगा। हालांकि न्यायालय का आदेश अभी अंतरिम है, लेकिन पिछले दिनों रक्षा मंत्रालय ने भी इस आशय का आदेश दिया था कि उपनल के माध्यम से केवल पूर्व सैनिकों को ही रोजगार दिया जाए।
लेकिन इस निगम पर मौजूदा सरकार ने अपना मैकेनिज्म थोपा और बगैर किसी मानक के बम्पर भर्ती कर डाली। यह माध्यम आउटसोर्सिंग का है। जिस मंत्री जिस अफसर को जो पसंद आया उसकी भर्ती करा ली गई। उपनल के माध्यम से करीब बीस हजार व्यक्तियों को रोजगार दिया गया है। लेकिन यह व्यवस्था उन्हीं पूर्व सैनिकों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई जिनके लिए इसका गठन हुआ था।
उपनल के माध्यम से रखे जाने वालों के लिए कोई मानक भी तय नहीं थे। कुशल कर्मियों केपदों पर नियमित भर्ती करने के बजाय अकुशल लोगों को नियुक्ति दे दी गई। इससे सरकारी सिस्टम में काम की गुणवत्ता तो गिरी है, योग्य युवाओं के हाथों से अवसर भी छिन गए।
उपनल से भर्ती को लेकर पिछले दिनों मुख्य सचिव के आफिस में हुई बैठक में तो प्रमुख सचिव न्याय ने यहां तक कह दिया था कि यह एक असंवैधानिक कार्य है, इसे सरकार को बंद कर देना चाहिए। लेकिन सरकार हर रोज उपनल से नियुक्त हुए लोगों के रोजगार की सुरक्षा की गारंटी लेने में लगी रही।
यह सारी व्यवस्था बिगाड़ने का श्रेय भी मौजूदा कांग्रेस सरकार को ही जाता है। 2013 में मुख्य सचिव ने एक ऐसा शासनादेश जारी किया जिसके तहत पूर्व सैनिकों से इतर किसी की भी भर्ती उपनल से की जाने लगी। कुल मिलाकर पूर्वसैनिकों व आश्रितों के हिस्से तीस से चालीस फीसदी पद ही आ सके।
पूर्व सैनिकों के लिए बने निगम के माध्यम से लगभग 20 हजार लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें पूर्व सैनिक और उनके आश्रितों की संख्या लगभग 6 हजार हैं। वहीं निगम से लगभग 2700 कर्मचारी राज्य से बाहर तैनात है।