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Dehradun News: दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं

Tue, 30 Jun 2026 01:19 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 01:19 AM IST
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No anticipatory bail for rape accused
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (पॉक्सो) मंजु सिंह मुंडे की अदालत ने आरोपी विपिन यादव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और आरोपी ने विवेचना में सहयोग भी नहीं किया है।
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आरोपी की ओर से दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि वर्ष 2025 से उसकी और पीड़िता की दोस्ती थी। पीड़िता ने स्वयं उसे फोन कर आर्थिक मदद मांगी थी, जिस पर उसने सात हजार रुपये दिए। बाद में पीड़िता और उसके सहयोगियों ने पुलिस चौकी बुलाकर 15 लाख रुपये की मांग की। पैसे न देने पर केस दर्ज कराने की धमकी भी दी। आरोपी का दावा था कि डर के कारण उसने अलग-अलग तिथियों में एक लाख रुपये, 10 हजार रुपये और 50 हजार रुपये भी दिए। उसने अदालत से कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर निराधार है।
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वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर अपने घर बुलाया, नशीला पदार्थ पिलाया और उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपी लगातार फरार है और विवेचना में किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहा है।
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अदालत ने केस डायरी और विवेचना के अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया पीड़िता के बयान और एफआईआर में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। साथ ही संबंधित थाना की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। उसके फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को झूठा फंसाए जाने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई न्यायोचित आधार नहीं बनता। इसके साथ ही विपिन यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।


Iवाद खारिज करने की मांग ठुकराईI
सिविल अदालत ने संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति से जुड़े विवाद में प्रतिवादियों की उस आपत्ति को खारिज कर दिया है, जिसमें मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादी की ओर से प्रथम दृष्टया वाद का कारण दर्शाया गया है और केवल प्रतिवादियों के दावों के आधार पर मुकदमा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि वादी ने अपने वादपत्र में विवाद का पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है। प्रतिवादियों की ओर से भुगतान किए जाने और अन्य तथ्यों से जुड़े विवाद साक्ष्य के परीक्षण के बाद ही तय किए जा सकते हैं। इस स्तर पर इन तथ्यों के आधार पर मुकदमा खारिज नहीं किया जा सकता। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने प्रतिवादियों की प्रारंभिक आपत्ति का निस्तारण करते हुए मुकदमे को आगे सुनवाई के लिए जारी रखने का आदेश दिया।
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