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मसूरी की नितिका ने राखी को बनाया आर्थिकी का जरिया
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मसूरी। मलिंगगार निवासी नितिका चौहान के हौसले और लगन से परिवार को रोजगार का नया जरिया मिल गया है। नितिका ने राखी को आर्थिकी का जरिया बनाया और अब परिवारवालों के सहयोग से काफी हद तक आमदनी का संकट दूर हो गया है। नितिका के राखी का कारोबार अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है और राखी की मांग काफी बढ़ गई है।
नितिका चौहान ने बताया कि पिछले साल कोरोना काल के दौरान पति कोरोना संक्रमित हो गए और पूरा परिवार होम क्वारंटीन हो गया। रोजगार का कोई ठोस जरिया ने होने से घर चलाना मुश्किल हो गया। इस बीच राखी बनाने का काम शुरू किया। शुरूआत में तीन सौ राखियां बनाईं, जो सारी बिक गईं। कोरोना संक्रमण की वजह से बाजार बंद होने से राखियों की मांग भी घट गई। घर में बनी राखी को लेकर लोगों में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई दी, लेकिन राखी बनाने का काम जारी रखा। बहरहाल अब लोगों को हाथ से बनी राखियां खूब भा रही हैं। राखी को कुछ नया लुक देने के बाद मांग बढ़ने लगी है। आसपास ने लोगों के अलावा कुछ दुकानदारों ने भी आर्डर दिया है। फिलहाल एक दिन में घर में करीब एक सौ राखियां बनाई जाती हैं। एक राखी करीब 10 रुपये में बिक जाती है। वर्तमान में एक हजार राखियों की डिमांड आ गई है।
नितिका चौहान कहती है कि पिछली बार की तुलना में इस बार लोग उनकी राखियां ज्यादा पसंद कर रहे हैं। राखी बनाने के साथ ही अब लक्ष्मी-गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं और घर के सजावटी सामान भी बनाए जाते हैं। इस काम में परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है। नीतिक कहती हैं कि घर में रहकर महिलाएं इस तरह के काम से अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकती हैं। सरकार को इस तरह के काम करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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नितिका चौहान ने बताया कि पिछले साल कोरोना काल के दौरान पति कोरोना संक्रमित हो गए और पूरा परिवार होम क्वारंटीन हो गया। रोजगार का कोई ठोस जरिया ने होने से घर चलाना मुश्किल हो गया। इस बीच राखी बनाने का काम शुरू किया। शुरूआत में तीन सौ राखियां बनाईं, जो सारी बिक गईं। कोरोना संक्रमण की वजह से बाजार बंद होने से राखियों की मांग भी घट गई। घर में बनी राखी को लेकर लोगों में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई दी, लेकिन राखी बनाने का काम जारी रखा। बहरहाल अब लोगों को हाथ से बनी राखियां खूब भा रही हैं। राखी को कुछ नया लुक देने के बाद मांग बढ़ने लगी है। आसपास ने लोगों के अलावा कुछ दुकानदारों ने भी आर्डर दिया है। फिलहाल एक दिन में घर में करीब एक सौ राखियां बनाई जाती हैं। एक राखी करीब 10 रुपये में बिक जाती है। वर्तमान में एक हजार राखियों की डिमांड आ गई है।
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नितिका चौहान कहती है कि पिछली बार की तुलना में इस बार लोग उनकी राखियां ज्यादा पसंद कर रहे हैं। राखी बनाने के साथ ही अब लक्ष्मी-गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं और घर के सजावटी सामान भी बनाए जाते हैं। इस काम में परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है। नीतिक कहती हैं कि घर में रहकर महिलाएं इस तरह के काम से अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकती हैं। सरकार को इस तरह के काम करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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