फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   ngo making money on tiger preservation

बाघ मरें तो मरें, बजट पूरा मिले

Tue, 24 Dec 2013 04:41 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Dec 2013 04:41 PM IST
विज्ञापन
ngo making money on tiger preservation

प्रदेश के वन और वन्यजीवों के नाम पर हर साल देश-विदेश से करोड़ों रुपये का बजट हासिल करने वाली गैर सरकारी संस्थाएं (एनजीओ) बाघों के शिकार पर कितनी गंभीर हैं, इसका अंदाजा हाल में मारे गए बाघों के मामलों से लगाया जा सकता है।

विज्ञापन


प्रदेश और इसकी सीमा पर एक के बाद एक तीन बाघ मार डाले गए, लेकिन अब तक किसी एनजीओ ने इसके खिलाफ आवाज उठाना तक जरूरी नहीं समझा है।

कागजों पर होता है काम
उत्तराखंड में सक्रिय एनजीओ की कार्यशैली वन विभाग से जुदा नहीं है। इन संस्थाओं के प्रतिनिधि फील्ड में मूवमेंट करने, मुखबिर बनाने, वन्यजीवों के संरक्षण के बजाय अपने कार्यालयों तक ही सीमित हैं।
विज्ञापन


कोई देहरादून में बैठकर तो कोई हल्द्वानी में बैठकर प्रदेशभर के बाघों और गुलदारों का संरक्षण दावा करने में जुटा है।

केवल बजट के लिए बने एनजीओ
एनजीओ अब तक बजट को खपाने से इतर कोई काम करती नजर नहीं आई हैं। एक भी ऐसी संस्था नहीं है, जो शिकार से पहले ही वन विभाग या पुलिस को सूचना दे सके।

आलम यह है कि ज्यादातर संस्थाओं के पदाधिकारी महज सरकारी अफसरों की हां में हां मिलाते नजर आते हैं। इसी का नतीजा है कि तीन बाघों के शिकार के बावजूद किसी भी संस्था की ओर से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग नहीं उठाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश में ये एनजीओ सक्रिय
डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, पीएफए, डब्ल्यूपीएसआई, आरपरेशन आई आफ द टाइगर, वाइल्ड लाइफ प्रीजर्वेशन सोसाइटी आफ इंडिया, कार्बेट टाइगर फाउंडेशन

करोड़ों में आता है बजट
एक अनुमान के अनुसार उत्तराखंड में बाघ और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में काम करने वाली संस्थाओं को सालाना तीन से चार करोड़ रुपये का बजट आता है। जानकारों का कहना है कि अगर इस बजट का ठीक से जमीन पर इस्तेमाल किया जाए तो खुद ही शिकार की घटनाएं थम जाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed