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पहली बार कटाव रोकने को अपनाई नई तकनीक

Mon, 06 Jun 2016 04:02 PM IST
मो. यामीन अंसारी/ अमर उजाला, सितारगंज
मो. यामीन अंसारी/ अमर उजाला, सितारगंज Updated Mon, 06 Jun 2016 04:02 PM IST
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new technology to prevent erosion in river
- फोटो : demo pic

अब नहर में प्रदूषण नहीं होगा और नहर का पक्का तटबंध होने से बाढ़ सुरक्षा भी मजबूत रहेगी। क्योंकि, उत्तराखंड सिंचाई विभाग प्रदूषणमुक्त नहरें बनाने के लिए जियो सेल तकनीक का प्रयोग कर रहा है।

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इस तकनीक से कंकरीट के तटबंध की जरूरत नहीं है। इस पर मवेशियों के लिए घास भी उगाई जा सकती है। ये प्रयोग उत्तराखंड में पहली बार सितारगंज की अपर बैगुल नहर पर किया जा रहा है। इसके प्रयोग के लिए बैगुल नहर के 50 मीटर हिस्से में जियो सेल का तटबंध लगाया गया है, जो नहर की सुरक्षा के साथ ही प्रदूषण को भी रोकेगा।
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सिंचाई विभाग के मुताबिक पत्थर की पीचिंग से सुरक्षा तो होती है। लेकिन, जल संरक्षण नहीं हो पाता था। कंकरीट के तटबंध का पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
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पर्यावरण को बचाने और जल संरक्षण के उद्देश्य से विभाग की ओर से जियो सेल तकनीक को अपनाया गया है। जिया सेल नहरों में कंकरीट के तटबंधों से ज्यादा प्रभावी है। जियो सेल तटबंध बनाने पर कंकरीट के तटबंध से लागत भी कम लगती है।

सिडकुल स्थित अपर बैगुल नहर के गढ़ी बियर हेड के पास सिंचाई विभाग ने 50 मीटर लंबाई में जियो सेल तटबंध बनाकर नहर के दोनों ओर कच्चे तटबंध पक्के किए गए हैं।

यह तकनीक उत्तराखंड में पहली बार सितारगंज की अपर बैगुल नहर पर प्रयोग की गई है। इससे नहर में जल संरक्षण होगा और पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा। जियो सेल के ऊपरी हिस्से पर मवेशियों के लिए घास भी उगाई जा सकती है। अगर, ये सफल होती है तो बरसात के बाद नदी, नहर व नालों को जियो सेल से पक्का किया जाएगा।

क्या है जियो सेल
जियो सेल पॉलीमर बेस प्रोडक्ट है। ये वेबकॉम में होता है। भूमि में कटान हो जाए, जहां मिट्टी कमजोर हो या फिर पहाड़ों पर मिट्टी सरक जाती हो या पत्थर लुढ़क जाते हैं। ऐसे में इसे लगाकर कटान को रोका जाता है। जियो सेल जालीदार होता है। जिसे तटबंध के दोनों ओर लगाया जाता है। इसकी ऊंचाई 75 एमएम होती है।

जियो सेल में बने छेद घास उगाने में सहायक होते हैं। जियो मेम्बरन (एचडीपीई) हाई डेनसिटी पॉलीमर सीट होती है। यह परतनुमा और एक एमएम मोटी होती है। इसे नदी, नाले व नहरों के तल में लगाया जाता है। ताकि, पानी का रिसाव न हो सके। जियो सेल के तटबंध की लाइफ करीब 50 साल से अधिक मानी जाती है।


नहर पर पक्के तटबंध बनाने के लिए जियो सेल तकनीक अपनाई गई है। अगर, ये तकनीक बैगुल नहर पर कारगर साबित होती है तो अन्य जगहों पर भी जियो सेल के तटबंध बनाए जाएंगे।
- संजय राज, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड, सितारगंज

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