नई पगार के भत्ते तैयार, केंद्र के फैसले का इंतजार

राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 19 May 2017 11:08 AM IST
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रम में नई पगार लेने वाले राज्य सेवा के कर्मचारियों को भत्तों के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
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उत्तराखंड सरकार ने वेतन भत्तों के निर्धारण का जिम्मा जिस वेतन समिति को सौंपा है, उसकी संस्तुतियां तब तक फाइनल नहीं होंगी जब तक केंद्र अपने कर्मचारियों के लिए भत्ते जारी नहीं कर देता। केंद्र में भत्तों के निर्धारण के लिए गठित अशोक लवासा समिति ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन, अभी भत्तों को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।


प्रदेश में भत्तों के निर्धारण का जिम्मा पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडेय की अध्यक्षता में गठित वेतन समिति को सौंपा गया है। इससे पहले वेतन समिति सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रम में नई पगार का निर्धारण कर उसकी सिफारिशें शासन को सौंप चुकी है।

अब कर्मचारियों को नई पगार के हिसाब से भत्तों का इंतजार है। वेतन समिति ने भत्तों के निर्धारण को लेकर अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। लेकिन समिति केंद्र से पहले भत्ते निर्धारित करके विसंगति या अंतर के हालात पैदा नहीं होने देना चाहती। इसलिए उसने तय किया है कि वह केंद्र में निर्धारित भत्तों पर होने वाले निर्णय के बाद ही अपनी संस्तुतियों को फाइनल करेगी। यानी केंद्रीय भत्तों के जारी होने के बाद ही वह अपनी संस्तुतियों को ‘फाइनल टच’ देगी।

सातवें वेतन आयोग के अनुक्रम में भत्तों का निर्धारण अंतिम दौर में है। हम केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अशोक लवासा समिति ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। उसकी संस्तुतियां स्वीकार ली गई हैं। अगले 10-15 दिन में केंद्र सरकार भत्ते जारी कर सकती है। केंद्रीय भत्तों के आलोक में समिति राज्य सेवकों के भत्तों का निर्धारण कर उसकी संस्तुति शासन को सौंपेगी।
- इंदु कुमार पांडेय, अध्यक्ष, वेतन समिति

ये हैं प्रमुख भत्ते
उत्तराखंड विकास भत्ता, मकान किराया भत्ता, परिवार कल्याण भत्ता, वाहन भत्ता, धुलाई भत्ता, आहर भत्ता, पोस्ट ग्रेजुएट भत्ता, सचिवालय सेवा भत्ता समेत कई अन्य भत्ते हैं, जिन्हें सातवें वेतन के हिसाब से तय होना हैं।

खराब माली हालत भी है अड़चन
भत्तों के निर्धारण की संस्तुति वेतन समिति शासन को सौंप भी देगी, तब भी सरकार अपनी माली हालत को देखकर ही निर्णय लेगी। वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो नई पगार के हिसाब से निर्धारित होने वाले भत्तों से राजकोष पर खर्च का बोझ बढ़ेगा।

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