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पांचों धाम के लिए होगा अलग रास्ता

Sat, 24 Aug 2013 12:53 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 24 Aug 2013 12:53 PM IST
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new optional war to temples

उत्तराखंड सरकार अब पांचों धाम (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब) में नए सिरे से वैकल्पिक सड़क मार्ग बनाने की तैयारी कर रही है।

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हर धाम में आने-जाने के लिए अलग सड़क बनाने की कोशिश है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के मुताबिक यह कोशिश इसलिए भी है कि आपदा के समय कम से कम एक मार्ग खुला रह सके। सरकार नदी किनारे की सड़कों की माप-जोख कर उन्हें नदियों से दूर करना चाहती है।
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शुक्रवार को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेमिनार में मुख्यमंत्री ने कहा कि वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए जीएसआई (जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) को सर्वे करने के लिए कहा गया है। मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी बात की गई है।
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हालांकि, सेमिनार में इस बात के भी संकेत मिल गए कि प्रदेश सरकार के लिए इस कोशिश को अमली जामा पहनाना आसान नहीं होगा।

बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की शिवालिक परियोजना के मुख्य अभियंता केके राजदान ने कहा कि आपदाग्रस्त और पहाड़ी क्षेत्र में नई तकनीक से ही सड़कों का निर्माण करना होगा। भूस्खलन वाले क्षेत्रों में सुरंग बनानी होगी। उन्होंने कहा कि बीआरओ सड़क की मरम्मत करता है, नए मार्ग नहीं खोजता।

इसके लिए स्लोप स्टेबलाइजेशन, जियोग्रिड, रिवर ट्रेनिंग आदि नई तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन इस पर स्वीकृति नहीं मिली है।


राजदान के मुताबिक पर्वतीय जिलों में सड़क बनाने में वन अधिनियम और ईको सेंसिटिव जोन में निर्माण की स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण आदि कई तरह की परेशानियां हैं। भविष्य की परेशानियों से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि जो करना है तुरंत ही करना होगा।

अगले साल तक का इंतजार किया गया तो देर हो जाएगी। कोई नहीं जानता कि अगले साल कितना और नुकसान होगा। सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि नई तकनीक का उपयोग किए बिना पुनर्निर्माण नहीं हो सकता। इसके लिए कुशल और दक्ष लोगों की जरूरत होगी जिसकी प्रदेश में कमी है। खुद प्रमुख सचिव एस राजू ने भी यह स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को इसमें आगे आना चाहिए।

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