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नए सहायक प्रोफेसरों को पांच साल पहाड़ में देनी होगी सेवा
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कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के दूरदराज इलाकों में स्थित डिग्री कॉलेजोें में शिक्षकों की कमी न हो, इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग की ओर से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों को पांच साल तक अनिवार्य रूप से पहाड़ में सेवाएं देनी होंगी। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि राज्य के सभी डिग्री कॉलेजों में जल्द ही सौ फीसदी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी।
दून विवि में आयोजित कार्यक्रम के बाद मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने से पूर्व 104 महाविद्यालयों में से 41 में प्राचार्य नहीं थे। इन कॉलेजों में महज 47 फीसदी शिक्षकों की तैनाती थी। 56 कॉलेजों को सरकारी भवनों के बजाय किराए के भवनों में संचालित किया जा रहा था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। सभी 104 कॉलेजों में प्राचार्योें की तैनाती करने के साथ ही 82 को सरकारी भवन मुहैया करा दिया गया है। कॉलेजों में 93 फीसदी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। राज्य में कुल 877 असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है। जिनमें से 171 की नियुक्ति लोक सेवा आयोग द्वारा की जा चुकी है, जिन्हें जल्द ही पर्वतीय क्षेत्र के कॉलेजों में तैनात किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई न प्रभावित न हो, इसके लिए प्राचार्यों को अधिकृत किया गया है कि वे अपने स्तर पर अस्थायी तौर पर 25000 रुपये मासिक मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करें जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते हों। यूजीसी मानकों के अनुरूप 60 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन उत्तराखंड देश में इकलौता राज्य है जहां 53 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक की नियुक्ति की गई है। राज्य में शिक्षकों के जितने भी पद खाली हैं वे सब जल्द ही भरे जाएंगे ताकि शिक्षा के स्तर को उच्च स्तरीय बनाया जा सके।
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संख्या का आंकलन करने के लिए कमेटी गठित
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. रावत ने बताया कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की संख्या का आंकलन करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जो यह पता लगाएगी कि आखिरकार किस कॉलेज में कितने बच्चे हैं और उक्त कॉलेज में छात्र-छात्राओं की संख्या के सापेक्ष कितने शिक्षकों की कमी है या शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा कि राज्य में तमाम ऐसे कॉलेज हैं जहां शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। ऐसे शिक्षकों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
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दून विवि में आयोजित कार्यक्रम के बाद मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने से पूर्व 104 महाविद्यालयों में से 41 में प्राचार्य नहीं थे। इन कॉलेजों में महज 47 फीसदी शिक्षकों की तैनाती थी। 56 कॉलेजों को सरकारी भवनों के बजाय किराए के भवनों में संचालित किया जा रहा था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। सभी 104 कॉलेजों में प्राचार्योें की तैनाती करने के साथ ही 82 को सरकारी भवन मुहैया करा दिया गया है। कॉलेजों में 93 फीसदी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। राज्य में कुल 877 असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है। जिनमें से 171 की नियुक्ति लोक सेवा आयोग द्वारा की जा चुकी है, जिन्हें जल्द ही पर्वतीय क्षेत्र के कॉलेजों में तैनात किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई न प्रभावित न हो, इसके लिए प्राचार्यों को अधिकृत किया गया है कि वे अपने स्तर पर अस्थायी तौर पर 25000 रुपये मासिक मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करें जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते हों। यूजीसी मानकों के अनुरूप 60 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन उत्तराखंड देश में इकलौता राज्य है जहां 53 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक की नियुक्ति की गई है। राज्य में शिक्षकों के जितने भी पद खाली हैं वे सब जल्द ही भरे जाएंगे ताकि शिक्षा के स्तर को उच्च स्तरीय बनाया जा सके।
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संख्या का आंकलन करने के लिए कमेटी गठित
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. रावत ने बताया कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की संख्या का आंकलन करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जो यह पता लगाएगी कि आखिरकार किस कॉलेज में कितने बच्चे हैं और उक्त कॉलेज में छात्र-छात्राओं की संख्या के सापेक्ष कितने शिक्षकों की कमी है या शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा कि राज्य में तमाम ऐसे कॉलेज हैं जहां शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। ऐसे शिक्षकों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।