मैगी की पाठशाला में सबने प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव की एबीसी(अवेयरनेस, बिहेवियर चेंज, कम्यूनिकेशन) की सीख ली। मौका था अमर उजाला-नेस्ले मैगी की ओर से प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर सेमिनार का। सेमिनार में आए विशेषज्ञों ने जहां मोनो लेयर प्लास्टिक पैकिंग की वकालत की तो वहीं युवाओं ने प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव को लेकर कई सवाल भी पूछे। शनिवार को ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. केपी नौटियाल सभागार में नेस्ले मैगी और अमर उजाला के संयुक्त तत्वावधान में ‘इन्फ्लुएंसर इंटरेक्शन सेशन’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में नेस्ले इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट कारपोरेट अफेयर्स संजय खजुरिया ने कहा कि यह तो शुरुआत है। अभी इस बदलाव को लागू करने में कई साल लगेंगे।
देहरादून में लगी मैगी की पाठशाला, दूनवासियों ने सीखी प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव की ‘एबीसी’
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प्लास्टिक बेहद काम का, इसे पर्यावरण फ्रेंडली बनाने की जरूरत
उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में 1950 से आज तक 8.3 बिलियन टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ है, जिसमें से केवल नौ प्रतिशत ही रिसाइकिल हुआ। 80 प्रतिशत कचरा जमीन में मिला दिया गया। भारत में भी हर साल 26,000 टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है, जिसके निस्तारण को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसमें मल्टी लेयर प्लास्टिक की महत्ता नहीं है, जो कि पर्यावरण पर सबसे बड़ा बोझ बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक बेहद काम का पदार्थ है लेकिन इसे पर्यावरण फ्रेंडली बनाने की जरूरत है। इसके लिए करीब 30-32 कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं।
भारी संख्या में लोग मौजूद रहे
उन्होंने बताया कि कंपनियां जल्द ही मल्टी लेयर से मोनो लेयर प्लास्टिक की ओर अग्रसर हो रही हैं। अकेले नेस्ले इंडिया ने ही एक साल में 17 हजार टन प्लास्टिक का निस्तारण किया है। 15 सितंबर से दून-मसूरी में चले दो मिनट सफाई के नाम अभियान में मैगी के 1.15 लाख रैपर एकत्र किए गए, जिनका निस्तारण किया जा रहा है।
इन संस्थाओं ने लिया हिस्सा: वेस्ट वॉरियर्स, गति फाउंडेशन, मैड, गूंज, बीएफआईटी, जेबीआईटी, डीबीआईटी, सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट और ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय।