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Dehradun News: लेआउट प्लान में स्वीकृत से करीब 100 प्लॉट अधिक बेच डाला
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- 1986 में 680 प्लॉट का लेआउट हुआ था एमडीडीए में स्वीकृत, दर्शाया गया 1988 में
- पहले 46 प्लॉट और बाद में 54 प्लॉट तराशकर कम दामों पर कर दी रजिस्ट्री
द सैनिक सहकारी आवास समिति लिमिटेड, डिफेंस कॉलोनी के इन पूर्व पदाधिकारियों ने ले आउट प्लान में फर्जीवाड़ा किया था। ले आउट प्लान में जो प्लॉट स्वीकृत हुए थे, उनसे 100 प्लॉट अधिक बेच दिए गए। ये सभी प्लॉट खुली भूमि में तराशे गए। इसके लिए एमडीडीए में जमा किए गए ले आउट प्लान को दो साल बाद का दर्शाया गया। यही नहीं इसके अलावा भी 18 हजार वर्गमीटर भूमि की 125 लोगों को रजिस्ट्री समय-समय पर सर्किल रेट से कम में की गई।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि इस समिति ने सेना मुख्यालय के करीब 10 लाख रुपये के अनुदान से 183 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसमें टाइप ए, ए वन, बी, बी वन, सी, डी श्रेणी के अलग-अलग क्षेत्रफल के कुल 680 प्लॉट बेचने के लिए तराशे गए। इसका समिति के बॉयलॉज में भी उल्लेख किया गया। यही नहीं जो लोग इन प्लॉट को खरीदेंगे वह इसे किसी अन्य को भी ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन डायरेक्शन 1960 के अनुसार ओपन स्पेस यानी खुली भूमि पार्क, खेलकूद के मैदान और सामुदायिक भवन आदि के निर्माण के लिए प्रयोग में लाई जा सकती है। जब एमडीडीए का गठन हुआ तो समिति ने 680 प्लॉट वाले इस लेआउट को वहां से 1986 में स्वीकृत कराया। इसमें बाकी खुली जमीन को ऐसे ही रखा गया।
मगर, बाद में आए समिति के पदाधिकारियों ने इस लेआउट में फर्जीवाड़ा किया और खुद से ही इसे 1988 में स्वीकृत होना दर्शा दिया गया। इस लेआउट में 680 की जगह 726 प्लॉट बिक्री के लिए थे। यानी 46 प्लॉट अधिक। इसके बाद 54 और प्लॉट तराशे गए। इन्हें भी सर्किल रेट से अधिक पर बेच दिया गया। ये सभी 100 प्लॉट डिफेंस कॉलोनी की इसी खुली भूमि से तराशे गए थे। ये प्लॉट सभी पूर्व सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को बेचे जाने थे। मगर, पदाधिकारियों ने पैसे के लालच में सामान्य लोगों को भी प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी।
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18221 वर्गमीटर जमीन इसके अलावा भी बेच दी
शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2013 में एक आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी। इसमें और भी चौंकाने वाले मामले सामने आए। पता चला कि समिति के पास इस लेआउट के अलावा 18221 वर्गमीटर भूमि और भी थी। ये भी सार्वजनिक और खुले भू-भाग थे। ये सभी यहां के निवासियों के हितों के लिए छोड़े गए थे। मगर, तत्कालीन समिति के इन पदाधिकारियों ने इस जमीन की भी 125 लोगों को सर्किल रेट से कम में रजिस्ट्री कर दी। यही नहीं कुछ प्लॉट वर्ष 2022 से अब तक ऐसे भी बेचे गए, जिनमें ओपर स्पेस की भूमि को मिलाकर इन्हें और बड़ा कर दिया गया। मसलन, कोई प्लॉट 235 वर्गमीटर का था तो उसे 361 मीटर कर दिया गया। इसी तरह कई अन्य प्लॉट भी बड़े किए गए।
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- पहले 46 प्लॉट और बाद में 54 प्लॉट तराशकर कम दामों पर कर दी रजिस्ट्री
द सैनिक सहकारी आवास समिति लिमिटेड, डिफेंस कॉलोनी के इन पूर्व पदाधिकारियों ने ले आउट प्लान में फर्जीवाड़ा किया था। ले आउट प्लान में जो प्लॉट स्वीकृत हुए थे, उनसे 100 प्लॉट अधिक बेच दिए गए। ये सभी प्लॉट खुली भूमि में तराशे गए। इसके लिए एमडीडीए में जमा किए गए ले आउट प्लान को दो साल बाद का दर्शाया गया। यही नहीं इसके अलावा भी 18 हजार वर्गमीटर भूमि की 125 लोगों को रजिस्ट्री समय-समय पर सर्किल रेट से कम में की गई।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि इस समिति ने सेना मुख्यालय के करीब 10 लाख रुपये के अनुदान से 183 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसमें टाइप ए, ए वन, बी, बी वन, सी, डी श्रेणी के अलग-अलग क्षेत्रफल के कुल 680 प्लॉट बेचने के लिए तराशे गए। इसका समिति के बॉयलॉज में भी उल्लेख किया गया। यही नहीं जो लोग इन प्लॉट को खरीदेंगे वह इसे किसी अन्य को भी ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन डायरेक्शन 1960 के अनुसार ओपन स्पेस यानी खुली भूमि पार्क, खेलकूद के मैदान और सामुदायिक भवन आदि के निर्माण के लिए प्रयोग में लाई जा सकती है। जब एमडीडीए का गठन हुआ तो समिति ने 680 प्लॉट वाले इस लेआउट को वहां से 1986 में स्वीकृत कराया। इसमें बाकी खुली जमीन को ऐसे ही रखा गया।
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मगर, बाद में आए समिति के पदाधिकारियों ने इस लेआउट में फर्जीवाड़ा किया और खुद से ही इसे 1988 में स्वीकृत होना दर्शा दिया गया। इस लेआउट में 680 की जगह 726 प्लॉट बिक्री के लिए थे। यानी 46 प्लॉट अधिक। इसके बाद 54 और प्लॉट तराशे गए। इन्हें भी सर्किल रेट से अधिक पर बेच दिया गया। ये सभी 100 प्लॉट डिफेंस कॉलोनी की इसी खुली भूमि से तराशे गए थे। ये प्लॉट सभी पूर्व सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को बेचे जाने थे। मगर, पदाधिकारियों ने पैसे के लालच में सामान्य लोगों को भी प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी।
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18221 वर्गमीटर जमीन इसके अलावा भी बेच दी
शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2013 में एक आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी। इसमें और भी चौंकाने वाले मामले सामने आए। पता चला कि समिति के पास इस लेआउट के अलावा 18221 वर्गमीटर भूमि और भी थी। ये भी सार्वजनिक और खुले भू-भाग थे। ये सभी यहां के निवासियों के हितों के लिए छोड़े गए थे। मगर, तत्कालीन समिति के इन पदाधिकारियों ने इस जमीन की भी 125 लोगों को सर्किल रेट से कम में रजिस्ट्री कर दी। यही नहीं कुछ प्लॉट वर्ष 2022 से अब तक ऐसे भी बेचे गए, जिनमें ओपर स्पेस की भूमि को मिलाकर इन्हें और बड़ा कर दिया गया। मसलन, कोई प्लॉट 235 वर्गमीटर का था तो उसे 361 मीटर कर दिया गया। इसी तरह कई अन्य प्लॉट भी बड़े किए गए।