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Dehradun News: दून विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन
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दून विश्वविद्यालय की साहित्यिक व वाद-विवाद समिति वात्सल्य की ओर से चौथे गौरा देवी स्मारक राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक समावेशी और प्रगतिशील विकसित भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है रहा।
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया जिनमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), आईसीएआर-आईवीआरआई (बरेली, उत्तर प्रदेश), रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), मोतीलाल नेहरू कॉलेज (नई दिल्ली) और उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालय व महाविद्यालय शामिल रहे। प्रत्येक टीम में दो वक्ताओं ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किए। एसओएल की डीन डॉ. चेतना पोखरियाल महिला आरक्षण कानून को जहां एक ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आवश्यक सुधार बताया वहीं दूसरी ओर इसके विलंबित क्रियान्वयन और संरचनात्मक चुनौतियों पर भी चर्चा की।
प्रतियोगिता में अंग्रेजी वर्ग में दून विश्वविद्यालय की शिव्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, संजना गुप्ता (डीआईटी विश्वविद्यालय) द्वितीय स्थान पर रहीं और राजश्री (दून विश्वविद्यालय) तृतीय स्थान पर रहीं। हिंदी वर्ग में आरव शर्मा (दून विश्वविद्यालय) ने प्रथम स्थान हासिल किया, संस्कृति दशमाना (दून विश्वविद्यालय) द्वितीय स्थान पर रहीं तथा हिमानी पाल (डीएवी पीजी कॉलेज) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार डीएवी पीजी कॉलेज को दिया गया।
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निर्णायक मंडल में कमला पंत, डॉ. देवेंद्र बुडाकोटी, अजय जुगरान और दीपांजलि राठौर शामिल रहे। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने गौरा देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. देवेंद्र भसीन ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार दुर्गेश डिमरी, डॉ. राजीव, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. आबशार अब्बासी, छात्र संघ अध्यक्ष अंशुमान और प्रो. हर्ष घोभाल समेतत्न्य लोग उपस्थित रहे।
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इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया जिनमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), आईसीएआर-आईवीआरआई (बरेली, उत्तर प्रदेश), रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), मोतीलाल नेहरू कॉलेज (नई दिल्ली) और उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालय व महाविद्यालय शामिल रहे। प्रत्येक टीम में दो वक्ताओं ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किए। एसओएल की डीन डॉ. चेतना पोखरियाल महिला आरक्षण कानून को जहां एक ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आवश्यक सुधार बताया वहीं दूसरी ओर इसके विलंबित क्रियान्वयन और संरचनात्मक चुनौतियों पर भी चर्चा की।
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प्रतियोगिता में अंग्रेजी वर्ग में दून विश्वविद्यालय की शिव्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, संजना गुप्ता (डीआईटी विश्वविद्यालय) द्वितीय स्थान पर रहीं और राजश्री (दून विश्वविद्यालय) तृतीय स्थान पर रहीं। हिंदी वर्ग में आरव शर्मा (दून विश्वविद्यालय) ने प्रथम स्थान हासिल किया, संस्कृति दशमाना (दून विश्वविद्यालय) द्वितीय स्थान पर रहीं तथा हिमानी पाल (डीएवी पीजी कॉलेज) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार डीएवी पीजी कॉलेज को दिया गया।
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निर्णायक मंडल में कमला पंत, डॉ. देवेंद्र बुडाकोटी, अजय जुगरान और दीपांजलि राठौर शामिल रहे। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने गौरा देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. देवेंद्र भसीन ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार दुर्गेश डिमरी, डॉ. राजीव, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. आबशार अब्बासी, छात्र संघ अध्यक्ष अंशुमान और प्रो. हर्ष घोभाल समेतत्न्य लोग उपस्थित रहे।