फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   National Cancer Awareness Day 2023 Uttarakhand News Uterine cancer is happening at young age Now

National Cancer Awareness Day: कम उम्र में हो रहा बच्चेदानी का कैंसर, पढ़ें बचाव के लिए क्या कहते हैं डॉक्टर

Tue, 07 Nov 2023 07:20 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 07 Nov 2023 07:20 PM IST
सार

दून अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि अस्पताल में मुंह के कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर आदि के मरीज आते रहते हैं।

विज्ञापन
National Cancer Awareness Day 2023 Uttarakhand News Uterine cancer is happening at young age Now
,राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कम उम्र की महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर तेजी से बढ़ने लगा है। बच्चेदानी का कैंसर महिलाओं में 50-55 वर्ष की उम्र में होता था, लेकिन अब 18 से 35 साल की उम्र में देखने को मिल रहा है। ऐसे में महिलाओं की जिंदगी में मां बनने पर ग्रहण लग रहा है। महिलाओं की बच्चेदानी निकलनी पड़ रही है। हाल ही में दून अस्पताल में 18 साल की युवती में बच्चेदानी का कैंसर देखने को मिला है।

विज्ञापन


दून अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि अस्पताल में मुंह के कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर आदि के मरीज आते रहते हैं। इसके अलावा बच्चेदानी के मुंह का कैंसर और बच्चेदानी का कैंसर भी महिलाओं में तेजी से फैल रहा है। यह जागरूकता की कमी के कारण हो रहा है। कैंसर का पता शुरूआती अवस्था में लग जाए तो इससे बचाव हो सकता है।
विज्ञापन


कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाएं
रिंग रोड जोगीवाला स्थित पिंक क्लीनिक की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी सिंह ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वायरल इंफेक्शन से बच्चेदानी का कैंसर होता है। इसलिए एचपीवी (पैपस्मीयर) टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए। इस कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन भी लगवा लेनी चाहिए। नौ से 14 साल की उम्र में दो डोज और 14 साल से अधिक उम्र पर इसकी तीन डोज लगती हैं। हालांकि यह वैक्सीन सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध नहीं है। जब इस कैंसर की शुरूआत होती है तो पहले एचपीवी वायरल इंफेक्शन होता है। इसके बाद कैंसर का रूप ले लेता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


National Games 2023: उत्तराखंड की मीरा दास और प्रभात ने बढ़ाया मान, जीते सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल

कोशिश करते कि बच्चेदानी न निकालें 
डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि बच्चेदानी निकालने से हार्मोनल समस्या, हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए प्रयास रहता है कि महिलाओं की 45 वर्ष की उम्र तक बच्चेदानी न निकाली जाए। इसलिए रेडिएशन से ही इलाज किया जाता है। जब गंभीर स्थिति हो जाती है तब सर्जरी होना बिल्कुल भी संभव नहीं होता है।

कैंसर फैलने की मुख्य वजह
- एक से अधिक पार्टनर से संबंध बनाना
- प्राइवेट पार्ट की सफाई न रखना
- माहवारी में पैड के स्थान पर गंदा कपड़ा इस्तेमाल करना
- कम उम्र में शादी होना
- कम उम्र में बच्चे होना

लक्षण
- माहवारी में अनियमितता
- कमर में दर्द
- बदबू वाला व्हाइट डिस्चार्ज
- मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed