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RO था, पर दूषित पानी पीकर मरती रही संवासिनियां

Tue, 29 Dec 2015 12:36 PM IST
ब्यूरो / अमर उजला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजला, देहरादून Updated Tue, 29 Dec 2015 12:36 PM IST
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nari niketan samwasini death due to dirty water.

देहरादून नारी निकेतन में आरओ लगा होने के बावजूद संवासिनियां दूषित पानी पीकर मौत का शिकार होती रहीं।

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यह हैरतभरी जानकारी सोमवार को उस वक्त सामने आई जब अमर उजाला में प्रकाशित खबर ‘दो मौतों के बाद आरओ स्वीकृत’ पढ़कर ग्रीन पार्क कॉलोनी निवासी एक शख्स ने सवाल उठाया कि हमने दिसंबर-2014 में नारी निकेतन में आरओ लगवाया था।

दो वर्ष तक (दिसंबर 2016) आरओ की फ्री मेंटिनेंस गारंटी थी, फिर ऐसा कैसे हो गया? जब हमने आरओ के बारे में डीपीओ मीना बिष्ट से पूछा तो बेहद गैर जिम्मेदाराना जवाब सामने आया कि हां, किचन में आरओ लगा तो था, मगर खराब हो गया। यानी, कंपनी को आरओ ठीक कराने के लिए महज एक कॉल नहीं करके नारी निकेतन प्रबंधन की ढिलाई ने दो संवासिनियों की जान ले ली और कई अन्य को मौत की राह पर धकेल दिया है।
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बल्लूपुर के निकट ग्रीन पार्क कालोनी में रहने वाले बैंक से सीनियर मैनेजर पद से सेवानिवृत्त गुरु प्रसाद वर्मा इस घटना से बेहद आहत हैं, वे कहते हैं कि निकम्मेपन और संवेदनहीनता की ऐसी बर्बर नजीर शायद की कहीं मिले। उन्होंने बताया कि एक साल पहले भी नारी निकेतन में संवासिनियों की डायरिया से बीमार होने की खबरें आई थीं।
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उस वक्त वे वहां की तत्कालीन अधीक्षिका से मिले। अधीक्षिका ने वहां शुद्ध पानी के लिए आरओ की जरूरत बताई थी। तीन दिसंबर 2014 को पलटन बाजार स्थित सचदेवा स्टोर से आरओ खरीदा था। स्वयं मिस्त्री को ले जाकर रसोई में आरओ लगवाया। दो वर्ष तक उसकी वारंटी थी।

वर्मा कहते हैं कि वह पब्लिसिटी नहीं चाहते थे इसलिए किसी से इसका जिक्र नहीं किया। नारी निकेतन में आरओ नहीं होने की खबर अमर उजाला में पढ़कर उन्होंने यह बातें बताईं। दानदाता वर्मा के दावों की पुष्टि के लिए अमर उजाला ने सचदेवा स्टोर के मालिक विजय मोहन सचदेवा से संपर्क किया, उन्होंने न केवल आरओ के खरीदने की पुष्टि कि बल्कि डुप्लीकेट बिल भी दिखाया। सचदेवा ने बताया कि उसकी सर्विस या खराबी को लेकर उन्हें या सर्विस सेंटर को कभी कोई फोन नहीं आया।  

नारी निकेतन में दान दिया क्या?
इस घटनाक्रम के साथ एक बिन्दु यह भी उभर कर सामने आया कि नारी निकेतन को दान में मिली वस्तुओं को लेकर प्रबंधन का क्या नजरिया है? इस बात की जांच होनी चाहिए कि नारी निकेतन को कब-कब और क्या-क्या दान में मिला? ये वस्तुएं संवासिनियों तक पहुंचती थीं या नहीं?

उनका कहीं कोई रिकॉर्ड है क्या? अमर उजाला की आम शहरियों से अपील है कि अगर किसी ने बड़ी संख्या में या मूल्यवान वस्तुएं नारी निकेतन को दान दी हैं तो हमें सबूत समेत बताएं। हम जानकारी करने की कोशिश करेंगे कि उसका लाभ संवासिनियों को मिला या नहीं ? इसका कोई रिकॉर्ड है क्या?


निकम्मेपन और संवेदनहीनता की ऐसी बर्बर नजीर शायद की कहीं मिले। एक साल पहले भी नारी निकेतन में संवासिनियों की डायरिया से बीमार होने की खबरें आई थीं। उस वक्त वहां की अधीक्षिका से मिला था। उन्होंने शुद्ध पानी के लिए आरओ की जरूरत बताई थी। तीन दिसंबर 2014 को पलटन बाजार स्थित सचदेवा स्टोर से आरओ खरीदा था। मिस्त्री के साथ जाकर निकेतन की रसोई में आरओ लगवाया था। उसकी दो वर्ष तक  की वारंटी थी। इसके बावजूद संवासिनियों को शुद्ध पानी नहीं मिलने से मैं हैरान हूं।
- गुरु प्रसाद वर्मा

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