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मोदी के 'डर' से सरकार करेगी कई फैसले

Sat, 14 Dec 2013 06:34 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 14 Dec 2013 06:34 PM IST
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narendra modi dehradun rally and congress

नरेंद्र मोदी की रविवार को होने वाली रैली के मद्देनजर राज्य सरकार कर्मचारियों से लेकर विकास से संबंधित मुद्दों पर ताबड़तोड़ फैसले लेने के मूड में है।

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बहुगुणा सरकार रैली के एक दिन पहले कैबिनेट बैठक कर कई तोहफे बांट सकती है। चूंकि मोदी आपदा राहत कार्यों का भी मुद्दा उठा सकते हैं, इसलिए बैठक में पुनर्निर्माण पर भी फैसले लिए जा सकते हैं।
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कैबिनेट बैठक में सरकार एडीबी के सहयोग से पुनर्वास की समस्या का समाधान करने का प्रस्ताव रखने की तैयारी में है। इसके अलावा हिमाचल की तर्ज पर छह साल तक नियमित सेवा करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने पर भी फैसला किया जा सकता है।
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सरकार बड़े फैसले लेगी
कर्मचारियों को सरकार अब पितृत्व अवकाश देने की तैयारी भी कर रही है। वहीं परिवहन पंजीकरण शुल्क बढ़ाने पर भी सरकार फैसला ले सकती है।

कैबिनेट में मुख्य मुद्दा रोड साइड कंट्रोल एक्ट में संशोधन का भी है। बताया जा रहा है कि आपदा में सड़कों को हुए नुकसान को देखते हुए अब सरकार इस बात की भी कोशिश कर रही है कि सड़कों के निर्माण की तकनीक को भी अधिक तवज्जो दी जाए।

नई नियुक्तियों का रास्ता खोलने के लिए सरकार अब उच्चतर शिक्षा आयोग को लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर निकालने पर भी कैबिनेट में प्रस्ताव ला रही है।

निजी सचिवों के वेतन, आबकारी कर्मियों से संबंधित नियमावली और आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये तक का इजाफा करने के फैसले पर भी कैबिनेट की मुहर लग सकती है।

मोदी को कोई मौका नहीं देने की मंशा
प्रदेश सरकार भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को ऐसा कोई मौका नहीं देने की कोशिश में हैं, जिससे वे उत्तराखंड की सरजमीं से ही कांग्रेस पर हमलावर हो सकें।

लिहाजा परदे के पीछे से कांग्रेस ने रैली से ठीक पहले कील कांटे दुरुस्त करने की कोशिश भी शुरू कर दी है। शनिवार को भाजपा मोदी की रैली में जुटी होगी और प्रदेश की कैबिनेट आपदा से लेकर कर्मचारियों के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रही होगी।

रैली से कांग्रेस पर दबाव

कांग्रेस के एक बड़े नेता के मुताबिक मोदी की रैली को भाजपा ने ऐसा बना दिया है जैसे की यह चुनावी रैली हो। ऐसे में कांग्रेस पर अपना घर संवारने का दबाव है। 16-17 जून को आई आपदा ने प्रदेश सरकार को मोदी के सामने भी ला खड़ा किया था।

मोदी की पीठ इसलिए भी ठोकी गई कि गुजराती तीर्थयात्रियों के बचाव और राहत के लिए उन्होंने दिल खोल कर इंतजाम किया।

लगे हाथों प्रदेश सरकार को भी न्यौता दिया कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण का काम गुजरात अपने दम पर कर लेगा। इस बार की आपदा से करीब-करीब सभी राज्यों के लोग प्रभावित हुए लिहाजा आपदा पर एक-एक टिप्पणी पर कई लोगों की निगाह रहेगी।


कर्मचारियों की भी नजर

शनिवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर कर्मचारियों की भी निगाह रहेगी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह का साफ कहना है कि कैबिनेट में कोई सकारात्मक फैसला नहीं किया गया तो कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे सकता है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से सरकार ने 2800 ग्रेड पे को समाप्त करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने का वादा किया था। पर दो माह में भी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ।

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