फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   nanda raj jat yatra will end wednesday

ससुराल पहुंची मां नंदा, पांच खाड़ू हुए विदा

Wed, 03 Sep 2014 12:20 PM IST
कर्ण प्रयाग से विनय बहुगुणा
कर्ण प्रयाग से विनय बहुगुणा Updated Wed, 03 Sep 2014 12:20 PM IST
विज्ञापन
nanda raj jat yatra will end wednesday

हिमालय की तलहटी स्थित मायके से उच्च हिममंडित भगवान शिव के धाम कैलास की ओर प्रस्थान कर रही मां नंदा बुधवार को होमकुंड पहुंच गई।

विज्ञापन


यहां राजजात की अगुवाई कर रहे चौसिंग्या खाड़ू (मेढ़े) की विदाई करके सांकेतिक रूप से मां का ससुराल पहुंचना मान लिया गया। इसी के साथ ही मां नंदा ससुराल पहुंच गई और 14 वर्षों का इंतजार भी खत्म हो गया।

बुधवार की सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर होमकुंड में हवन पूजन किया गया। जिसके बाद पांच खाड़ुओं को कैलाश रवाना कर दिया गया। होमकुंड से यात्रियों के वापस लौटने का दौर जारी है। इस बार मुख्य पूजा छोटा होमकुंड में हुई।
विज्ञापन


शिलासमुद्र में रात्रि विश्राम के बाद नंदा राजजात ने नवमी को तड़के चार बजे होमकुंड के लिए प्रस्थान किया। शिलासमुद्र से आगे बढ़ते हुए यात्रा कुछ दूर घीथोपिया पहुंचकर विश्राम करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

चार यात्रियों की हालत बिगड़ी, पव‌ित्र खाडू बीमार

nanda raj jat yatra will end wednesday

नंदा राजजात यात्रा के मंगलवार देर शाम शिलासमुद्र पहुंचने पर चार यात्रियों की हालत बिगड़ गई। उच्च हिमालयी क्षेत्र में आक्सीजन की कमी होने से यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। चारों यात्रियों को वेदनी लाया गया है।

वहीं नौटी से यात्रा की अगुवाई कर रहे चौसिंग्या खाडू के भी गंभीर रूप से बीमार होने की खबर है। सोमवार को उसके लिए देवाल से हेलीकाप्टर से दवाएं भेजी गई थी।

बता दें कि 18 अगस्त को नौटी से शुरू हुई नंदा राजजात यात्रा 16वें दिन 5333 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ज्यूंरागली को पार करते हुए शाम पांच बजकर 45 मिनट पर अपने चौथे निर्जन पड़ाव शिलासमुद्र पहुंची। सोमवार रात को रुपकुंड ट्रेक पर हिमखंड के टूटने से यात्रा मार्ग खतरनाक हो गया था। मंगलवार को यात्रा टूटे हिमखंड के ऊपर से होकर गुजरी।

बगुवावासा से छाए घने कोहरा होने से नंदा की डोली और छंतोलियों को ले जा रहे लोगों को हाथ पकड़ कर आगे जाना पड़ा। लोग एक दूसरे का चेहरा भी नहीं देख पा रहे थे।

शिला समुद्र की यह है मान्यता

nanda raj jat yatra will end wednesday

मान्यता है कि यहां पर हिमालय यात्रा के दौरान देवी ने एक शिला स्थापित की थी। आज भी इस शिला की पूजा की जाती है। यहां पहुंचने वाले शिला के बाहर से एक रेखा खींचते हैं, जिससे सभी नंदा भक्त शिला पर घी के गोले बनाकर फेंकते हैं। यह एक हंसी-ठिठोली के लिए होता है। इस परंपरा का नंदा जागरों में भी वर्णन मिलता है।

होमकुंड में नंदा की पूजा की जिम्मेदारी नंदा के धर्मभाई लाटू की होती है। विशेष पूजा के बाद चौसिंग्या खाडू की पीठ पर फंची (पोटली) बांधकर, जिसमें नंदा के लिए मायके की सामग्री वस्त्र, आभूषण, खाद्य पदार्थ, ककड़ी, कौंणी का बाल, दाणिम आरसा आदि रखकर उसे हिमालय के लिए विदा किया जाता है। मान्यता है कि यहां से विदा होकर चौसिंग्या खाडू शिवधाम चला जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed