नंदा की विदाईः ईड़ा-बधाड़ी में तो रात ही न हुई...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के कर्णप्रयाग नगर क्षेत्र का ईड़ा-बधाणी गांव सोमवार को कुछ यूं जगमगाया, मानो सोमवार को रात ही न हुई हो। एक किमी में फैला गांव पांच किलोमीटर का दायरा पार कर रहा था। रौशनी इस कदर की शहर भी मात खा जाए।
मौका था मां नंदा की यात्रा के पहले पड़ाव यहां (ईड़ा बधाणी) पहुंचने का। मां नंदा का मंदिर परिसर जो अन्य दिनों की अपेक्षा मुट्ठी की भांति छोटा दिखतो रहा हो, में भीड़ इतनी की मानो मां नंदा के आंगन में पूरी उमा नगरी (कर्णप्रयाग) उतर आई हो।
सोमवार देर शाम सवा सात बजे के आस पास यहां श्रीनंदा देवी की यात्रा पंहुची। ईड़ा-बधाणी में नंदा तो कर्णप्रयाग में उमा का मंदिर है। दोनों को ही भगवान शिव की पत्नी पार्वती का रूप माना जाता है।
'जाओ-जाओ लाटी मेरी, कैलाश जाओ'
मंदिर परिसर से जैसे ही राजछत्र (रिंगाल की छंतोली) और चौसिंग्या खाडू ने दूसरे पड़ाव नौटी के लिए प्रस्थान किया, तो नंदा के पश्वे बिलख-बिलख कर रोने लगे।
गांव की गलियों से होते नंदा घर-घर पर गई और अपने धर्म मैतियों (मायके) से लिपटकर विदा हुई। इस मौके पर मायके के लोग भी डबडबाई आंखों से उसे दुलार करते हुए उसके सुकुशल कैलाश पहुंचने की कामना कर रहे थे।
प्रात: 6 बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता दिन चढ़ने के साथ और विदाई की घड़िया नजदीक आते-आते हजारों की संख्या में पहुंच गया।
इस दौरान गांव की कई वृद्व और युवा महिलाएं जाओ-जाओ लाटी मेरी जाओ, लाटी मेरी कैलाश जाओ, पैर-पैर लाटी सिर का मुकुट.. आदि जागरें गाकर नंदा के बचपन से लेकर ससुराल विदा की लीला का वर्णन कर रहीं थी। मंदिर परिसर से लेकर रास्ते, चौक, खेत और घरों की छतों पर भक्तों का सैलाब उमड़ा था।
प्रात: 11.25 मिनट पर मां नंदा की छंतोली और चौसिंग्या खाडू ने ईड़ा-बधाणी से विदा लेते हुए नौटी के लिए प्रस्थान किया। इस मौके पर नंदा ने अपने अराध्य नृसिंह भगवान के भी दर्शन किए। गांव के रास्तों से होकर नंदा रिठोली और फिर जाख गांव पहुंची।
जेवर और श्रृंगार देकर की नंदा की विदाई
ईड़ा-बधाणी के लोग अपनी अराध्य मां नंदा को राजजात में पहुंचने पर जहां जेवर और श्रृंगार सामग्री तैयार कर बटुए भेंट करते हैं। वहीं इस मौसम की साग-सब्जी, फल और कलेऊ भी देते हैं।
बेटी का ससुराल हिमालय होने के कारण उसे गर्म कपड़े और अन्य सामग्री भी दी जाती हैं, जिससे उसे वहां परेशानी न हो।
ध्याणियों ने भी की नंदा की पूजा
ईड़ा-बधाणी में अपनी अराध्य देवी नंदा के दर्शनों के लिए पहुंची ध्याणियों ने भी पूजा-अर्चना कर बटुए भेंट किए। दिल्ली से परिवार सहित पहुंची उर्मिला फरस्वाण, रूड़की से आई कलावती कंडारी, गौचर से पहुंची विमला कनवासी, बेडाणू से पहुंची गोदाम्बरी देवी ने बताया कि वे दो दिन पूर्व ही अपने मायके आ गई थी। उन्होंने अपने घर, परिवार और सहित दोनों पक्षों की कुशलता की मनौती भी नंदा से मांगी।