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राजजात 2013 का एक भी काम नहीं हुआ पूरा
विनय बहुगुणा
Updated Sat, 03 Aug 2013 09:04 AM IST
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राजजात के चौथे पड़ाव सेम में भी समस्याएं पग-पग पसरी पड़ी हैं। राजजात तैयारियों के नाम पर यहां भी एक भी काम पूरा नहीं हुआ है। तैयारियों का आलम यह है कि कांसुवा से सेम तक पैदल मार्ग बना ही नहीं है। ऐसे में पूर्व के मार्ग के हाल बुरे हैं। यहां सेम डोभा में स्वीकृत पुलिया का निर्माण भी नहीं हो पाया है, जिससे राजजात में रास्तों को पार करना आसान नहीं है।
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समुद्र तल से करीब साढ़े 12 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित सेम राजजात का चौथा पड़ाव है। कांसुवा से राजजात मेरोली-हड़ाकोटी-ताल-चांदपुरी गढ़ी और यहां से उज्ज्वलपुर-तोप-सेम रात्रि प्रवास के लिए पहुंचती है। लेकिन हैरत यह है कि इन दोनों पैदल रास्तों की स्थिति बदहाल है। गांव में पेयजल लाइन, पानी का टैंक का निर्माण भी नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई समय से काम ठप पड़ा है। बीएसएनएल की संचार और ऊर्जा निगम की बिजली व्यवस्था भी बदहाल बनी हुई है।
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लाखों के काम नहीं हुए
3.44 लाख की लागत से कूड़ा प्रबंधन, 24 लाख के रैन शल्टर, 17.44 लाख में बनने वाला उज्ज्वलपुर-सेम-धारकोट पैदल मार्ग, 2.72 लाख से बनने वाली सेम-डोभा पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया है।
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चांदपुर गढ़ी में होती है नंदा की विशेष पूजा
कांसुवा से सेम के लिए विदा होते हुए मां नंदा की राजजात 36 गढ़वाल राजाओं की प्राचीन राजधानी चांदपुर गढ़ी पहुंचती है। यहां स्वयं टिहरी नरेश यात्रा का स्वागत करते हैं। अराध्य के दर्शन कर वे गढ़ी में स्थापित देवी मंदिर में विशेष-पूजा अर्चना करते हैं। यह क्षण काफी भावुक होता है। राजजात में यहां पर सबसे अधिक श्रद्वालु पहुंचते हैं। इसके बाद मां नंदा की छंतोली उज्ज्वलपुर से होते हुए सेम पहुंचती है। इन स्थानों पर देवी की विशेष पूजा की जाती है।
गढ़ी में नहीं हुए एक भी काम
गढ़वाल नरेशों की पुरानी राजधानी चांदपुर गढ़ी का राजजात से करीबी का नाता है। यहां तैयारियों के नाम पर कुछ भी नहीं है। पेयजल लाइन का निर्माण सेम के ग्रामीणों के विवाद के चलते आगे नहीं बढ़ पाया। बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि गढ़ी में ही राजजात के दौरान सबसे अधिक भीड़ एकत्र होती है। लेकिन साढ़े तीन फिट के एकल रास्ते पर कैसे इस दो तरफा भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा, इसका जवाब राजजात समिति के पास भी नहीं है। राजजात में गढ़ी की उपेक्षा को लेकर क्षेत्रीय जनता में भी भारी रोष है।
सेम में होती मां नंदा की विशेष पूजा
सेम गांव की बसावट गढ़वाल राजा कनकपाल के समय में मानी जाती है। मान्यता है कि यहां पर मां नंदा कुंड से उत्पन्न हुई थी। गांव में ही मां नंदा का प्राचीन मंदिर है। यहां पर गैरोली और चमोला गांव की छंतोलियां भी राजजात में शामिल होती है।
राजजात तैयारियों के नाम पर सेम पड़ाव पर किसी भी विभाग ने काम पूरे नहीं किए हैं। आपदा के बाद से प्रदेश सरकार को और त्वरित गति से मदद करनी थी। लेकिन हैरत यह है कि मुख्यमंत्री ही राजजात आयोजन से ही हाथ पीछे खींचने को कह रहे हैं। सरकार कुछ नहीं कर सकती, तो उसे कम से कम राजजात यात्रा के सफल संचालन के लिए सुरक्षा व्यवस्था तो मुहैया करानी ही चाहिए।
- राजेंद्र सिंह सगोई निवासी तोप/सेम गांव/ब्लाक प्रमुख कर्णप्रयाग
आपदा के बाद से सड़क से लेकर पैदल मार्ग व्यापक रुप से प्रभावित हुए हैं। संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को इनकी त्वरित मरम्मत करनी चाहिए। इस संबंध में शासन, प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से भी अवगत कराया जा चुका है।
- भुवन नौटियाल महामंत्री श्रीनंदा राजजात समिति
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