अपनों से वचन निभाने पहुंची मां नंदा
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अपनी ससुराल शिवलोक प्रस्थान करते वक्त ईणा बधाणी में अपने स्वागत से अभिभूत मां नंदा ने तत्कालीन ग्राम प्रधान जमन सिंह जदोड़ा को ससुराल जाते समय हर बार आने का वचन इस बार भी निभाया।
सोमवार को शुरू हुई राजजात मंगलवार को देर शाम ईड़ा बधाणी से नौटी लौट आईं। कुल दस किलोमीटर के पैदल सफर में नंदा कई गांवों के देवी-देवताओं से मिलीं। नंदा ने अगाध आस्था से भरी महिलाओं की भेंट स्वीकारी।
नौटी की पूरी घाटी में पूरे दिन नंदा के मंगल गीत गूंजते रहे। देवी के अक्षत और आशीर्वाद के लिए महिलाओं का आंचल फैला रहा। बिटिया नंदा की विदाई की बेला में मायकेवासियों की आंखें आंसुओं से भीगी थीं। नंदा के हजारों सहयात्री मौजूद थे। इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है।
ईड़ाबधाणी से करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई को पार कर नंदा जाख पहुंची तो यात्रा का रंग बदल गया।
नंदा को विदा करने महिलाएं चढ़ी सीधी चढ़ाई
ढोल, दमाऊं, रणसिंगा, भंकारू की आवाज के बीच नंदा की छंतोली और चौसिंग्या खाडू को छूने, देवी को भेंट देने के लिए जाख की महिलाएं उस जगह पहुंचीं जिसे मणताल कहा जाता है।
धार की इस जगह से आसपास का पूरा नजारा दिखता है। गांव की देवी से नंदा की भेंट हुई। रोड हेड से कुछ दूर इस गांव में ढोल, दमाऊं के सुरों के बीच नंदा के जयकारे गूंज रहे थे।
जाख के बाद के दयारकोट, कुकड़ई, कुडियाणी, गैरोली, नैणी पहुंची नंदा की छंतौली का भरपूर स्वागत हुआ। गांवों की सीमा पर नंदा से मिलने बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं थीं। नंदा को विदा करने के लिए महिलाओं ने कई किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़ने से भी गुरेज नहीं किया।
अभी नंदा ने सिर्फ 20 किमी का रास्ता पार किया है। उन्हें 260 किमी की यात्रा और तय करनी है। नंदा अब अपने अगले पड़ाव कांसुवा के लिए बुधवार को निकलेंगी। राजा के प्रतिनिधि राज कुंवरों का यह गांव नंदा के भव्य स्वागत की तैयारी में जुटा हुआ है।
रूट बदलने पर भड़के गैरोलीवासी, लगाया जाम
गैरोली। नंदा राजजात के दूसरे दिन परंपरागत मार्ग गैरोली से हटना आयोजकों को भारी पड़ गया। समय की बचत के लिए सदियों से यात्रा रूट पर स्थित गैरोली गांव को छोड़ देने पर भड़के स्थानीय लोगों ने जाम लगा दिया।
यात्रा दूसरे दिन ईड़ा बधाणी गांव से शुरू होकर कई गांवों से होते हुए नौटी पहुंचती है। यात्रा का रूट परंपरागत और कई प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा है। मंगलवार को पु़ड़ियाणी गांव के पास आयोजकों ने तय किया कि राजजात को गैरोली छोड़कर सीधे कनोट गांव ले जाया जाए।
तर्क था कि गैरोली सड़क मार्ग से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे वहां जाने में अधिक समय लग जाएगा। इसपर गैरोलीवासी गुस्सा गए। गांववालों ने नौटी सड़क मार्ग पर धरना दे दिया और भजन कीर्तन करने लगे।
सड़क के दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गई। आयोजन समिति और पुलिस को धरना स्थल पर लोगों को समझाने में खासी माथापच्ची करनी पड़ी। करीबन एक घंटे बाद सहमति बनी और यात्रा गैरोली होते हुए देरी से अपने गंतव्य पर पहुंची।