कैमरे की नजर से मां नंदा राजजात यात्रा
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एक कैमरामैन की नजर से नंदा जात को कवर करना एक ऐसा अनुभव है जिसे बयां करना मुश्किल है।
एक तरफ धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने को समेटने की जद्दोजहद तो दूसरी तरफ पहाड़ की खूबसूरती को भी सहेज पाने की चिंता।
यात्रा का हालांकि आज पहला ही दिन है पर ऐसे कई अनुभव है जिन्हें सहेजने में अमर उजाला के कैमरा मैन दिवाकर नेगी को बेहद बारीकी से ध्यान देना पड़ा। दिवाकर नेगी की जुबानी नंदा राजजात यात्रा की कहानी...
भीड़ का शांत स्वभाव अचरज भरा रहा
देवी-देवताओं को आग पर चलते देखना और नौटी की भीड़ का शांत स्वभाव मेरे लिए अचरज भरा रहा। मुझे सकून रहा कि मैं इस पल को सहेज पाया।
यात्रा जब हरे भरे खेतों के बीच में गुजर रही थी तो मुझे लगा कि मैं एक अलग ही दुनिया में हूं। हरे भरे खेतों के बीच में लाल रंग की नंदा की छंतौली का कंस्ट्राट अभूतपूर्व रहा। यात्रा में यात्रियों की अटूट भक्ति मेरे लिए अलग ही अनुभव था।
एक महिला अपने छोटे से बेटे को कंधे पर बिठाए यात्रा में शामिल थी। अपने कैमरे के सामान के साथ इस खड़ी चढ़ाई को पार करना मेरे लिए तक मुश्किल हो रहा था।
उस महिला को देखकर मुझे लगा कि नंदा की यह जात सिर्फ एक यात्रा भर नहीं है। यात्रा तो अब शुरू हुई है। पसीने से घुली मिली मेरी ये तस्वीरें शायद उन लोगों को सकून दें जो यात्रा में शामिल नहीं हो पाए। यही सोचकर मेरे कदम आगे बढ़ते जा रहे हैं।
भोले महाराज भी हुए शामिल
नंदा राजजात की शु़रुआत के समारोह में वीवीआईपी का भी तांता रहा। राजजात के शांत पानी में हलचल राज्यपाल अजीज कुरैशी के पहुंचने पर तो हुई ही।
पर स्थानीय लोगों के लिए चर्चा का विषय सतपाल महाराज के भाई भोले महाराज और उनकी पत्नी मंगला देवी का पहुंचना भी रहा। भोले महाराज पहली बार यात्रा में पहुंचे।
राजनीतिक पंडितों की नजर में यह सतपाल महाराज के गढ़ में सेंध लगाने जैसा भी रहा। यात्रा को फिलहाल पर्यटन से जोड़ने की कोशिश है। ऐसे में वीवीआईपी इसका मुख्य हिस्सा बनते दिख रहे हैं।
उफ, यह चढ़ाई, यह ड्यूटी
वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के साथ-साथ कई और की उपस्थिति भी थी। राज्यपाल मंचासीन होकर यात्रा की शुरूआत में शामिल हुए तो भोले महाराज और मंगला देवी पूजा अर्चना में शमिल हुए। दोनों ने ही नंदा को सोने और चांदी के गहनों की भेंट दी।
ज्यादा मुसीबत पुलिस ड्यूटी दे रहे जवानों की रही। हर 500 मीटर के बाद इन्हें रिपोर्ट करना पड़ रहा था कि नंदा की छंतौली की पोजीशन क्या है।
ऊपर से खड़ी चढ़ाई। ऐसे में छंतौली से दूर भी नहीं रह पा रहे थे और देर तक इनका रुकना भी नहीं हो पा रहा था।