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राजजातः वापसी की डगर में मां नंदा के भक्त

Sat, 06 Sep 2014 12:02 AM IST
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, घाट (चमोली)
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, घाट (चमोली) Updated Sat, 06 Sep 2014 12:02 AM IST
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nand doli back to its origin

वापसी के अंतिम पड़ाव पर शुक्रवार को कुरुड़ की नंदा का भरपूर स्वागत हुआ। नंदा अब शनिवार को अपने स्थल कुरुड़ जाएगी। दूसरी ओर सुतोल को छोड़कर राज राजेश्वरी नंदा भी कुलिंग पहुंच गई हैं। राजराजेश्वरी भी कुछ दिन बाद देवराड़ा पीठ पहुंचेगी।

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इधर नौटी से छंतोलियां लेकर होमकुंड पहुंचे नौटी के लोग शनिवार को कर्णप्रयाग में स्नान कर नौटी पहुंचेंगे। राजजात समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल के मुताबिक कुंवरों की विदाई सात सितंबर को नौटी में होगी।
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नंदा जात में शामिल कुरुड़ की दोनों भगवतियां अब वापसी की राह पर है। शुक्रवार को कुरुड़ की नंदा वापसी में देर शाम घाट पहुंच गई। सुतोल से करीब तीस किलोमीटर दूर का यह पड़ाव यात्रा का एक तरह से अंतिम पड़ाव भी है।
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यात्रियों के लौटने का सिलसिला लगातार जारी है और शुक्रवार को भी घाट में दिन भर यात्रियों का तांता लगा रहा। घाट से कुरुड़ करीब सात किलोमीटर दूर है। इस स्थिति का फायदा उठाकर घाट में कुरुड़ के कई लोग भी पहुंचे।

यात्रा की थकान लेकर लौट रहे नंदा भक्त

nand doli back to its origin

यात्रा के दौरान उठे विवाद से घाट भी अछूता नहीं रहा। यहां भी वाण और सुतोल के बीच हुए झगड़े और सुतोल में नंदा राजराजेश्वरी की डोली के न पहुंचने को लेकर बातचीत होती रही। कुरुड़ के लोग भी मान रहे हैं कि नंदा राजराजेश्वरी को सुतोल न जाने देना एक तरह से परंपरा की अनदेखी ही है।

कुरुड़ के मुंशीराम गौड़ के मुताबिक अब तक तीन जात में राजराजेश्वरी की डोली सुतोल जाती रही है। सुतोल को ही एक तरह से नंदा की मायके वापसी का संकेत माना जाता है। यहां से डोली वाण की ओर बढ़ती है पर वाण गांव में नहीं जाती। वाण नंदा का ससुराल क्षेत्र है। वाण की बजाय डोली कुलिंग होते हुए देवराड़ा पहुंचती है।

पर वापसी के पड़ाव घाट में यात्रा के अंतिम चरण की थकान भी देखने को मिली। नंदा के बीत और जागर घाट में गूंज रहे हैं पर यात्रा के शुरुआती दिनों का उत्साह यहां नहीं है। पिछली चार जात से लगातार भंडारे का आयोजन कर रहे राधाकृष्ण भट्ट के मुताबिक पिछले तीन दिन में घाट से होकर करीब 15 हजार यात्री वापस लौट चुके हैं। 1968 की जात में कुल 250 यात्री ही यहां से होकर वापस लौटे थे। वर्ष 2000 की जात में करीब 5000 यात्री यहां से वापस लौटे थे।

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