नमाज की जिस छुट्टी का देश में मचा हल्ला वह मिली ही नहीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए दी जाने वाली जिस छुट्टी का हल्ला पूरे देश में मचा, वह जुमे पर यानी शुक्रवार को मुस्लिम कर्मचारियों को मिल ही नहीं पाई।
जुमे की नमाज के कुछ देर पहले तक कर्मचारी छुट्टी मिलने के आदेश का इंतजार करते रहे, लेकिन अवकाश की अवधि स्पष्ट न होने से सचिवालय के अल्पसंख्यक और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच मामला अटका रहा। इससे कार्मिक विभाग अन्य विभागों को इस संबंध में कोई आदेश दे नहीं पाया।
22 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मुसलिम कर्मचारियों को अल्पकालिक अवकाश दिए जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन जब कैबिनेट के फैसले से संबंधित पत्रावली सामान्य विभाग के पास पहुंची तो इसमें सिर्फ अल्पकालिक अवकाश दर्ज था।
छुट्टी की अवधि को लेकर फंस गया पेंच
मामला यह फंसा कि अल्पकालिक अवकाश आखिर कितनी अवधि का होगा। इस प्रस्ताव के संबंध में अल्पसंख्यक विभाग ने अपना मत दिया था उसमें अवधि डेढ़ सौ मिनट की थी यानी दोपहर 12.30 बजे से दो बजे तक की।
सामान्य प्रशासन विभाग इस बात पर अड़ा रहा कि आदेश उसे जारी करना है। कैबिनेट के फैसले में अवधि का जिक्र ही नहीं है।
अगर अल्पसंख्यक विभाग का मत माना जाता है तो यह आदेश वही जारी करे। इस संबंध में दोनों विभागों के बीच कई बार वार्ता हुई। इसके साथ ही आला अधिकारियों से मशविरा लिया गया।
छुट्टी का टाइम करने की हुई बात
वार्ता में यह बात भी आई कि जुमे की नमाज में दिए जाने वाले अल्पकालिक अवकाश की अवधि डेढ़ सौ के स्थान पर 90 मिनट कर दी जाए।
इस पर भी ऊहापोह की स्थिति बनी रही। सामान्य विभाग विभाग अपनी बात पर अटल था कि कैबिनेट ने अल्पकालिक अवकाश कहा है, आदेश में भी यही लिखा जाएगा।
इस वजह से शुक्रवार को कोई आदेश नहीं हो पाया। उम्मीद की जा रही है कि सोमवार को इस संबंध में अंतिम निर्णय के बाद शासनादेश जारी हो सकेगा।