{"_id":"5f398f068ebc3e3d1d1392e4","slug":"naithavana-festival-celebrated-in-jaunsar-bawar-vikas-nagar-news-drn3532853157","type":"story","status":"publish","title_hn":"जौनसार में धूमधाम से मना कोदों की नैठावण पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जौनसार में धूमधाम से मना कोदों की नैठावण पर्व
विज्ञापन
साहिया क्षेत्र में कोदों की नैठावण पर्व पर मंडुवे की गुडाई करती महिलाएं।
- फोटो : VIKAS NAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साहिया। भादो मास की संक्रांति पर जहां पूरे प्रदेश में घी संक्रांति की धूम रही, वहीं जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में कोदों की नैठावण त्योहार मनाया गया। घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन पकाए गए। हालांकि, इस बार कोरोना महामारी के चलते पर्व की रंगत फीकी रही।
जनजातीय क्षेत्र अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिए पहचाना जाता हैं। क्षेत्र में कई ऐसे त्योहार मनाए जाते हैं जो अन्य कहीं नहीं मनाए जाते। इन्हीं त्योहारों में से एक है कोदों की नैठावण। यह त्योहार मुख्यता मंडुवे की गुड़ाई से संबंधित है। जून के प्रथम सप्ताह में मंडुवे की बुआई की जाती है। इसके बाद सावन में इसकी गुड़ाई की जाती है। पूरे एक माह तक गुड़ाई चलने के बाद संक्रांति के दिन यह गुड़ाई समाप्त हो जाती है। अंतिम दिन तक जिस परिवार की गुड़ाई समाप्त नहीं होती। उस परिवार की मदद को पूरा गांव उसके खेतों में गुड़ाई में जुट जाता है। इसके बाद प्रत्येक गांव में त्योहार का आयोजन किया जाता है।
लोग ईष्ट देवता की पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह, दिनेश सिंह, कृपाल सिंह, मोहन सिंह, प्रेम सिंह, प्रीतम सिंह, सूरत सिंह आदि का कहना है कि इस साल यह त्योहार महज घरों तक सीमित होकर रह गया है। इस बार महामारी के चलते सार्वजनिक रूप से इस पर्व का आयोजन नहीं किया गया। अन्य साल में इस दिन पंचायती आंगन में लोक नृत्य किया जाता है।
विज्ञापन
-----
बावर क्षेत्र में चिड़ोली संक्रांति की रही धूम
विकासनगर। संक्रांति पर्व पर जौनसार बावर में जहां कोदों की नैठावण पर्व मनाया गया। वहीं, बावर क्षेत्र में चिड़ोली(चीड़) की संक्रांति की धूम रही। लोगों ने घरों में चीड़ की पत्तियों की पूजा की। पूर्व समय तक क्षेत्र में यह मान्यता था कि भादो में सूरज पूरी तरह से काले बादलों की ओट में छिप जाता है। धरती तक सूरज की किरणें नहीं पहुंच पाती। ऐसे में भूतप्रेत का प्रकोप बढ़ जाता था। जिन्हें भगाने के लिए चीड़ की पत्तियां जलाई जाती थीं। आज से एक माह तक पूरे बावर क्षेत्र में रात के समय घरों में चीड़ की पत्तियां जलाई जाएंगी।
विज्ञापन
जनजातीय क्षेत्र अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिए पहचाना जाता हैं। क्षेत्र में कई ऐसे त्योहार मनाए जाते हैं जो अन्य कहीं नहीं मनाए जाते। इन्हीं त्योहारों में से एक है कोदों की नैठावण। यह त्योहार मुख्यता मंडुवे की गुड़ाई से संबंधित है। जून के प्रथम सप्ताह में मंडुवे की बुआई की जाती है। इसके बाद सावन में इसकी गुड़ाई की जाती है। पूरे एक माह तक गुड़ाई चलने के बाद संक्रांति के दिन यह गुड़ाई समाप्त हो जाती है। अंतिम दिन तक जिस परिवार की गुड़ाई समाप्त नहीं होती। उस परिवार की मदद को पूरा गांव उसके खेतों में गुड़ाई में जुट जाता है। इसके बाद प्रत्येक गांव में त्योहार का आयोजन किया जाता है।
विज्ञापन
लोग ईष्ट देवता की पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह, दिनेश सिंह, कृपाल सिंह, मोहन सिंह, प्रेम सिंह, प्रीतम सिंह, सूरत सिंह आदि का कहना है कि इस साल यह त्योहार महज घरों तक सीमित होकर रह गया है। इस बार महामारी के चलते सार्वजनिक रूप से इस पर्व का आयोजन नहीं किया गया। अन्य साल में इस दिन पंचायती आंगन में लोक नृत्य किया जाता है।
विज्ञापन
-----
बावर क्षेत्र में चिड़ोली संक्रांति की रही धूम
विकासनगर। संक्रांति पर्व पर जौनसार बावर में जहां कोदों की नैठावण पर्व मनाया गया। वहीं, बावर क्षेत्र में चिड़ोली(चीड़) की संक्रांति की धूम रही। लोगों ने घरों में चीड़ की पत्तियों की पूजा की। पूर्व समय तक क्षेत्र में यह मान्यता था कि भादो में सूरज पूरी तरह से काले बादलों की ओट में छिप जाता है। धरती तक सूरज की किरणें नहीं पहुंच पाती। ऐसे में भूतप्रेत का प्रकोप बढ़ जाता था। जिन्हें भगाने के लिए चीड़ की पत्तियां जलाई जाती थीं। आज से एक माह तक पूरे बावर क्षेत्र में रात के समय घरों में चीड़ की पत्तियां जलाई जाएंगी।