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सरकार का परचा हाईकोर्ट में खारिज

Sat, 22 Feb 2014 09:12 AM IST
अमर उजाला, नैनीताल
अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 22 Feb 2014 09:12 AM IST
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nainital highcourt and panchayat election

उत्तराखंड सरकार की ओर से पंचायत चुनाव कार्यक्रम को 30 जून तक बढ़ाने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।

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10 दिन का और समय दिया था
कोर्ट ने 29 मार्च से पूर्व ही चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। पूर्व में 10 फरवरी को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव कार्यक्रम 15 दिन आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर सरकार को 10 दिन का और समय दिया गया था।
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हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस बीएस वर्मा और न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को सरकार ने पंचायत चुनाव कार्यक्रम 30 जून तक आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था।
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निर्वाचन आयोग ने विरोध किया
सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने कोर्ट में तर्क दिया कि सदन ने एक स्वर से यह प्रस्ताव पारित किया है कि पंचायत चुनाव कराने से आपदा प्रभावित इलाकों में चल रहे पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसका विरोध किया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि इस प्रकरण में दो बार महाधिवक्ता की ओर से हलफनामा (अंडरटेकिंग) दिया जा चुका है और वैधानिक व्यवस्था के प्रावधानों के कारण राज्य सरकार का प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

विकास कार्यों पर असर की दलील
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि सरकार पंचायत चुनाव कराने से पहले राज्य में किए जा रहे पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में पड़ने वाले प्रभावों, नई पंचायत और नगरपालिका परिषदों के गठन एवं उच्चीकरण के कारण परिसीमन एवं आरक्षण पर होने वाले प्रभाव का आकलन करे।

दिया जा चुका है 10 दिन का समय
राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी दलील में कहा कि पूर्व में सरकार को दस दिन का समय दिया जा चुका है इसलिए और अधिक समय देना उचित नहीं है।

फिर भी हार नहीं मानेगी सरकार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पंचायत चुनाव सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। यही वजह है कि छह महीने चुनाव टालने के लिए अध्यादेश लाने को दैवी आपदा को आधार बनाया जा रहा है।

वैसे भी अध्यादेश के मामले में सरकार को राज्यपाल की दया पर निर्भर रहना होगा। चुनाव टालने का यह सुनियोजित तरीका सरकार को मुश्किल में भी डाल सकता है। इसलिए सरकार सर्वोच्च न्यायालय जाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की उलझन बढ़ गई है। लेकिन मुख्यमंत्री की छह महीने चुनाव टालने के लिए अध्यादेश लाने की सलाह पर तेजी से काम भी चल रहा है। अध्यादेश लाने के लिए दैवी आपदा से अभी तक नहीं उबर पाने का हवाला दिया जा रहा है।

सरकार की मंशा है कि छह महीने के समय के लिए अध्यादेश लाकर एक्ट में संशोधन कर लिया जाएगा। अभी अध्यादेश जारी करने के बाद आगामी सदन में मंजूरी ले ली जाएगी।

राह में हैं कई रोड़े
अध्यादेश में भी कानूनी अड़चन आएगी। संविधान और यूपी पंचायतीराज एक्ट में छह महीने से ज्यादा समय तक चुनाव टालने का कोई प्रावधान नहीं है। फिर भी सरकार की अध्यादेश लाने की तैयारी हैरत में डालने वाली है। वैसे भी इस अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

यदि ऐसा हुआ तो सरकार केखिलाफ कोर्ट कड़ी टिप्पणी भी कर सकती है। इसीलिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सर्वोच्च न्यायालय भी जा सकती है। सरकार को यह रास्ता इसलिए भी सुगम लग रहा है कि अध्यादेश खारिज होने से बेहतर यही होगा कि पहले अपनी बात रख ली जाए।


अपनाए कई हथकंडे
देहरादून। पंचायत चुनाव को टालने के लिए राज्य सरकार सारे हथकंडे अपना चुकी है। बाकायदा कुछ जिलाधिकारियों से राज्य निर्वाचन आयोग को इस आशय के पत्र भी भिजवाए गए कि चुनाव जरूरी तो है लेकिन फिलहाल आपदा का काम प्रभावित हो सकता है।

लेकिन आयोग इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। वैसे भी सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि पंचायत के लिए तो आपदा का बहाना हो गया लेकिन लोकसभा चुनाव से बचने की जुगत क्या होगी।

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