नगर निगम में अहम की लड़ाई ने ली सियासी अंगड़ाई

अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 22 Nov 2013 03:53 PM IST
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सफाई व्यवस्था की चिंता छोड़ नगर निगम में अब एक नया बवाल शुरू हो गया है। मेयर और मुख्य नगर अधिकारी के अहम की लड़ाई ने अब सियासी अंगड़ाई ले ली है। गुरुवार को एमएनए की चिट्ठी से बौखलाए भाजपा पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया धरने पर बैठ गए। उन्होंने मुख्य नगर अधिकारी पर अफसरों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
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मेयर खुलकर आए सामने
इस मुद्दे पर मेयर विनोद चमोली भी खुलकर सामने आ गए। वह अपने आदेश का वैधानिक परीक्षण करा रहे हैं।
वाहनों के अभाव में समय से कूड़ा उठान न होने से जहां पूरा शहर गंदगी से त्रस्त है वहीं इस गंभीर मुद्दे से परे निगम के मुखिया, अधिकारी और पार्षदों के बीच सियासी जंग छिड़ गई है। असल में, शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कूड़ा उठान न होने से मेयर ने डीवीडब्ल्यूएम कंपनी के अधिकारियों को तलब किया था।

22 वाहन खराब
कंपनी के अधिकारियों ने 22 वाहनों के खराब होने और उनकी मरम्मत के लिए बजट न होने की बात कही थी। उसके बाद मेयर ने अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों की बैठक में वाहनों की मरम्मत की बाबत समझौता कराया। समझौते के तहत निगम अपने खाते से 22 वाहनों की मरम्मत कराएगा और बाद में कंपनी यह रकम निगम को लौटाएगी। इस बीच सोमवार को हुए इस समझौते पर बुधवार को एमएनए अशोक कुमार ने ब्रेक लगा दिया। इतना ही नहीं उन्होंने बैठक में शामिल वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह और एएमएन उदय सिंह राणा को पत्र जारी करते हुए निगम के खाते से वाहन मरम्मत करने के समझौते को नाजायज ठहराते हुए इसे वित्तीय अनियमितता करार दिया।

पैसे की रिकवरी होगी
अलबत्ता उन्होंने अधिकारियों को वाहनों की मरम्मत अपने पैसे से कराने की सलाह तक दे डाली। उन्होंने अफसरों को चेताया भी कि अगर वाहनों की मरम्मत में निगम का पैसा लगा तो इसकी रिकवरी होगी। इस पत्र से दोनों अधिकारी सकते में आ गए। उधर यह खबर जब भाजपा पार्षदों तक पहुंची तो वे बौखला गए। भाजपा पार्षदों ने गुरुवार को मुख्य नगर अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान भाजपा पार्षद अमिता सिंह के नेतृत्व में एमएनए कक्ष के बाहर बैठ गए और जमकर नारे बाजी की।

दूसरी ओर मेयर विनोद चमोली का कहना है कि शहर में गंदगी की जो हालत है उससे अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने जो समझौता कराया था वह व्यवहारिक था। इसलिए उन्होंने अपने आदेश का वैधानिक परीक्षण कराया है।

क्यों उठाया कदम, सबके समझ से परे
असल में, नगर निगम पर डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी डीवीडब्ल्यूएम की टिपिंग फीस का लगभग पचास लाख रुपये बकाया है। जबकि कंपनी की पचास लाख रुपये जमानत राशि पहले से निगम के खाते में जमा है। निगम सूत्रों के अनुसार, समझौते में साफ कहा गया था कि जो रुपये निगम वाहनों की मरम्मत में लगाएगा वह राशि कंपनी को वापस करनी है। एक तो कंपनी का रुपया निगम दे नहीं रहा ऊपर से समझौते के तहत वाहनों की मरम्मत का खर्चा भी वसूलेगा। ऐसे में इस मामले में वित्तीय अनियमितता जैसा कोई मामला नजर नहीं आता।

पहले की तरह हो व्यवस्था
शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल ने मुख्य नगर अधिकारी से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पत्र लिख कर मांग की है कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी डीवीडब्ल्यूएम शहर की सफाई व्यवस्था बनाने में नाकाम है। इसलिए जनहित में पूर्व की तरह 30 वार्डों में निगम के कर्मचारी ही सफाई के लिए लगाए जाएं।

धरने में भी दिखी गुटबाजी
मुख्य नगर अधिकारी के खिलाफ धरने देने वालों में कुछ ही भाजपा पार्षद दिखे। ज्यादातर गायब रहे। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की गुटबाजी इसमें अहम रही। कई भाजपा पार्षद अंदर ही अंदर एमएनए को स्पोर्ट दे रहे हैं, जबकि अन्य मेयर के पक्ष में है।

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