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स्वच्छता के असली सिपाही हैं सफाई कर्मी : राज्यपाल
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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड (शहीद जसवंत सिंह मैदान) में कैंट बोर्ड की ओर से आयोजित दो दिवसीय स्वच्छता चौपाल का उद्घाटन किया। उन्होंने सफाई कर्मियों को स्वच्छता का सच्चा सिपाही बताया। कहा कि पर्यटन व तीर्थाटन के लिहाज से उत्तराखंड के लिए स्वच्छता के खास मायने हैं।
शुक्रवार को कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है। जिस प्रकार हम अपने घर को साफ रखते हैं, उसी प्रकार गली-मोहल्लों को भी साफ रखें। कहा कि अब समय आ गया है कि प्लास्टिक और वेस्ट मेटेरियल पर गंभीरता से विचार किया जाए। राज्यपाल ने इंदौर के स्वच्छता माॅडल की तारीफ करते कहा कि स्वच्छता के लिए सभी की सहभागिता जरूरी है। अपशिष्ट प्रबंधन व कूड़ा निस्तारण में तकनीक के समावेश को उन्होंने प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता मित्रों का सम्मान बेहद जरूरी है, क्योंकि वे ईश्वर के सबसे बड़े दूत हैं, जो हमारे आसपास स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग देते हैं। यह कार्यक्रम शहरी विकास निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। एसडीसी फाउंडेशन इसमें नाॅलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।
इस मौके पर महानिदेशक रक्षा संपदा अजय कुमार शर्मा ने समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। कैंट बोर्ड सीईओ ने बताया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट को केंद्र व राज्य सरकार, सभी नगर निकायों और कैंट बोर्ड के साथ ही अन्य हितधारकों के साथ साझा किया जाएगा।
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उद्घाटन सत्र में निदेशक रक्षा संपदा डाॅ. डीएन यादव, कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर अनिर्बन दत्ता, निदेशक शहरी विकास नवनीत पांडे, सोशल डेवलपमेंट फाॅर कम्युनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) के अध्यक्ष अनूप नौटियाल, कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह आदि मौजूद रहे।
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वेस्ट को बनाया बेस्ट मेटेरियल
स्वच्छता चौपाल में प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जिसमें कूड़ा निस्तारण की मशीन एवं उपकरण, बायोडिग्रेडेबल उत्पाद, प्लास्टिक वेस्ट से बने उत्पाद, बायो फ्यूल आदि के 51 स्टाॅल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। राज्यपाल ने इन स्टाॅलों का निरीक्षण कर आधुनिक उपकरणों व प्लास्टिक वेस्ट से बने उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने वेस्ट को बेस्ट मेटेरियल में परिवर्तित कर उसको उपयोगी बनाया है, जो कि सराहनीय है।
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चौपाल में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
चौपाल का पहला सत्र उत्तराखंड में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम रहा। पैनलिस्ट ने स्रोत से ही सूखे और गीले कचरे को अलग करने के साथ ही कचरे के प्रति लोगों को संवेदनशील और जागरूकता करने की जरूरत पर जोर दिया। दूसरे सत्र में स्वच्छता तकनीकी और विकल्प : अवसर और चुनौतियां विषय पर चर्चा की गई।
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शुक्रवार को कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है। जिस प्रकार हम अपने घर को साफ रखते हैं, उसी प्रकार गली-मोहल्लों को भी साफ रखें। कहा कि अब समय आ गया है कि प्लास्टिक और वेस्ट मेटेरियल पर गंभीरता से विचार किया जाए। राज्यपाल ने इंदौर के स्वच्छता माॅडल की तारीफ करते कहा कि स्वच्छता के लिए सभी की सहभागिता जरूरी है। अपशिष्ट प्रबंधन व कूड़ा निस्तारण में तकनीक के समावेश को उन्होंने प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता मित्रों का सम्मान बेहद जरूरी है, क्योंकि वे ईश्वर के सबसे बड़े दूत हैं, जो हमारे आसपास स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग देते हैं। यह कार्यक्रम शहरी विकास निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। एसडीसी फाउंडेशन इसमें नाॅलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।
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इस मौके पर महानिदेशक रक्षा संपदा अजय कुमार शर्मा ने समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। कैंट बोर्ड सीईओ ने बताया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट को केंद्र व राज्य सरकार, सभी नगर निकायों और कैंट बोर्ड के साथ ही अन्य हितधारकों के साथ साझा किया जाएगा।
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उद्घाटन सत्र में निदेशक रक्षा संपदा डाॅ. डीएन यादव, कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर अनिर्बन दत्ता, निदेशक शहरी विकास नवनीत पांडे, सोशल डेवलपमेंट फाॅर कम्युनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) के अध्यक्ष अनूप नौटियाल, कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह आदि मौजूद रहे।
वेस्ट को बनाया बेस्ट मेटेरियल
स्वच्छता चौपाल में प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जिसमें कूड़ा निस्तारण की मशीन एवं उपकरण, बायोडिग्रेडेबल उत्पाद, प्लास्टिक वेस्ट से बने उत्पाद, बायो फ्यूल आदि के 51 स्टाॅल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। राज्यपाल ने इन स्टाॅलों का निरीक्षण कर आधुनिक उपकरणों व प्लास्टिक वेस्ट से बने उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने वेस्ट को बेस्ट मेटेरियल में परिवर्तित कर उसको उपयोगी बनाया है, जो कि सराहनीय है।
चौपाल में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
चौपाल का पहला सत्र उत्तराखंड में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम रहा। पैनलिस्ट ने स्रोत से ही सूखे और गीले कचरे को अलग करने के साथ ही कचरे के प्रति लोगों को संवेदनशील और जागरूकता करने की जरूरत पर जोर दिया। दूसरे सत्र में स्वच्छता तकनीकी और विकल्प : अवसर और चुनौतियां विषय पर चर्चा की गई।