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Dehradun News: कैंसर के मरीज अनेक, इलाज को डाॅक्टर सिर्फ एक
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विदेशी जीवन शैली के रंग में ढल रहे लोग तेजी से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के शिकार होते जा रहे हैं। इसी को देखते हुए दून अस्पताल में अब कैंसर के मरीजों का विशेष पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। ताकि, मरीजों की सही जानकारी मिल सके। हालांकि, यहां कैंसर के इलाज के लिए सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध है। इससे परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में कैंसर का इलाज नहीं है। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में कैंसर का वार्ड शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो गए हैं लेकिन यहां पर भी कैंसर के इलाज के लिए सिर्फ एक ही डॉक्टर उपलब्ध है। देहरादून के अलावा गढ़वाल, सहारनपुर, रुड़की समेत उत्तर प्रदेश के कई लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। मरीजों का दबाव अधिक और डॉक्टरों की कमी के चलते काफी परेशानी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त, तला-भुना खाना और धूम्रपान के चलते कैंसर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। यही नहीं, मल्टीपल सेक्स पार्टनर से संबंध बनाने पर महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर हो रहा है। इसके अलावा युवा लड़कियों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनकी उम्र 30 से 32 वर्ष है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के कैंसर रोग विभाग के हेड डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में सबसे अधिक मुंह का कैंसर, आहार नाल का कैंसर, फेफड़े का कैंसर देखने को मिल रहा है। इससे पीड़ित 40 प्रतिशत महिलाएं हैं तो 60 प्रतिशत पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों में जागरूकता का अभाव है। यही वजह है कि कैंसर जैसी बीमारी लगातार बढ़ रही है। दून अस्पताल में वर्ष 2022 में 1800 कैंसर के मरीज देखे गए। जिसमें से 340 कैंसर के नए मरीज थे। कुल 478 मरीजों को कीमोथेरेपी दी गई। उन्होंने बताया कि कैंसर के उपचार के लिए लगातार संसाधन बढ़ाने पर कार्य चल रहा है।
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- 70 प्रतिशत मरीज आखिरी स्टेज में आते हैं उपचार को
डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि 70 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जो कैंसर की आखिरी स्टेज में इलाज के लिए आते हैं। इसलिए इन मरीजों के ठीक होने की संभावना भी कम होती है। अगर मरीज शुरुआत में आ जाते हैं तो उनको ठीक करने में आसानी होती है।
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जानकारी के मुताबिक, जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में कैंसर का इलाज नहीं है। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में कैंसर का वार्ड शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो गए हैं लेकिन यहां पर भी कैंसर के इलाज के लिए सिर्फ एक ही डॉक्टर उपलब्ध है। देहरादून के अलावा गढ़वाल, सहारनपुर, रुड़की समेत उत्तर प्रदेश के कई लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। मरीजों का दबाव अधिक और डॉक्टरों की कमी के चलते काफी परेशानी होती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त, तला-भुना खाना और धूम्रपान के चलते कैंसर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। यही नहीं, मल्टीपल सेक्स पार्टनर से संबंध बनाने पर महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर हो रहा है। इसके अलावा युवा लड़कियों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनकी उम्र 30 से 32 वर्ष है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के कैंसर रोग विभाग के हेड डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में सबसे अधिक मुंह का कैंसर, आहार नाल का कैंसर, फेफड़े का कैंसर देखने को मिल रहा है। इससे पीड़ित 40 प्रतिशत महिलाएं हैं तो 60 प्रतिशत पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों में जागरूकता का अभाव है। यही वजह है कि कैंसर जैसी बीमारी लगातार बढ़ रही है। दून अस्पताल में वर्ष 2022 में 1800 कैंसर के मरीज देखे गए। जिसमें से 340 कैंसर के नए मरीज थे। कुल 478 मरीजों को कीमोथेरेपी दी गई। उन्होंने बताया कि कैंसर के उपचार के लिए लगातार संसाधन बढ़ाने पर कार्य चल रहा है।
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- 70 प्रतिशत मरीज आखिरी स्टेज में आते हैं उपचार को
डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि 70 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जो कैंसर की आखिरी स्टेज में इलाज के लिए आते हैं। इसलिए इन मरीजों के ठीक होने की संभावना भी कम होती है। अगर मरीज शुरुआत में आ जाते हैं तो उनको ठीक करने में आसानी होती है।