यहां भूकंप आने से पहले घटी थीं 'रहस्यमयी' घटनाएं, मिलते हैं इस तरह के संकेत
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वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप आने से पहले कई तरह के संकेत मिलते हैं। यहां भी भूकंप आने से पहले कुछ ऐसी ही घटनाएं घटी जो सालों तक रहस्य बनी रहीं। इसके बाद खुलासा हुआ कि वह भूकंप के कारण हुआ था।
लातूर में भूकंप आने के 10 दिन पहले वहां नील कंठेश्वर मंदिर के कुंड से पानी गायब हो गया था। इस पर वहां के पुजारी ने किसी अनिष्ट की आशंका जाहिर की थी। इसी तरह चमोली में भूकंप आने के 15 दिन पहले पानी से कपड़े साफ होना बंद हो गए।
यह बात जियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. प्रभास पांडेय ने बताई। उन्होंने कहा कि भूकंप आने के पहले पानी के केमिकल बदल जाते हैं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम के वैज्ञानिक सत्र में डॉ. प्रभास पांडेय ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भूकंप आने के बाद नील कंठेश्वर के कुंड में फिर पानी आ गया।
पांडेय ने बताया कि भूकंप के पहले ‘पानी की क्वालिटी बदलती है, लेकिन क्वांटिटी में अधिक फर्क नहीं आता।’ इस तरह के साक्ष्यों पर अगर ध्यान रखा जाए तो भूकंप के पहले सतर्क हुआ जा सकता है।
सात सौ साल पुराने भूकंप के भूगर्भ में निशान
उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान रखा जाना चाहिए। भूकंप के बाद स्लोप को स्थिर होने बड़ी दिक्कतें आती हैं। इस मौके पर नेशनल पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फरीदाबाद के प्रोफेसर राजेंद्र कुमार पांडेय ने भी विचार व्यक्त किए। वैज्ञानिक सत्र में नेशनल सेंटर फॉर सीइसमोलोजी के निदेशक डॉ. विनीत कुमार गहलोत ने कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में एकत्रित हो रही ऊर्जा के संबंध में बताया।
यहां कई ‘फॉल्ट’ हैं। इनमें सैकड़ों साल की ऊर्जा एकत्रित है। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता के प्रोफेसर सुप्रियो मित्रा ने भी उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र में इकट्ठी हो रही ऊर्जा पर भूकंप की आशंका व्यक्त की। इस मौके पर राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने भूकंपरोधी गांव विकसित और इंफ्रास्ट्रकचर की ‘लाइफ साइकिल’ को ध्यान में रखकर विकास करने का मशविरा दिया।
सात सौ साल पुराने भूकंप के भूगर्भ में निशान
कुमाऊं मंडल के रामनगर क्षेत्र के भूगर्भ में करीब सात सौ साल पुराने भूकंप के निशान मिले हैं। वाडिया हिमालय भू गर्भ संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी आर.जे.जी पेरूमल ने बताया कि इस क्षेत्र में खुदाई की गई थी। इसके बाद सैंपल की जांच की गई। इससे पता चला कि यहां ‘मेगा’ भूकंप आया था। उन्होंने बताया कि इससे आकलन किया गया कि इसकी तीव्रता 8 मैग्नीट्यूड से अधिक रही होगी।