रोजेदार ने रोजा तोड़कर बचाई हिंदू युवक की जान, उसकी बातें सुनकर भर आई परिजनों की आंखें
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मोहल्ला आलापुर निवासी असलम ने वो मिसाल पेश की, जिसे इंसानियत कहते हैं। असलम ने अपना रोजा तोड़ते हुए कोटाबाग के रमेश शाह के लिए रक्तदान किया। इस बात का जिक्र शहर में जिसने भी सुना, उसने युवक की दिल खोलकर तारीफ की।
नगर के मोहल्ला आलापुर निवासी असलम अली (40) ने रविवार को अपने परिचित कोटाबाग (नैनीताल) निवासी बीमारी से ग्रस्त रमेश शाह को चकरपुर रोड स्थित पांडे अस्पताल में ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया था। रमेश की आंत का ऑपरेशन होना था।
सोमवार को रमेश को दो यूनिट रक्त (बी पॉजिटिव) की जरूरत पड़ी। रिश्तेदारों सहित कई जगह बात करने पर एक रिश्तेदार ने एक यूनिट रक्तदान तो कर दिया, लेकिन एक यूनिट खून की जरूरत और पड़ रही थी, जिसका इंतजाम नहीं हो पाने से परिजन परेशान थे।
इधर, शहर के एक शोरूम में काम करने वाले असलम अली को जब यह बात पता चली तो वह शोरूम मालिक से छुट्टी लेकर रक्तदान के लिए आननफानन में अस्पताल के ब्लड बैंक परिसर में पहुंच गए। उन्होंने डॉक्टर को बताया कि उनका ब्लड ग्रुप भी बी पॉजिटिव है।
यहां बता दें कि असलम रमजान में पूरे रोजे रखते हैं और सोमवार को भी उनका रोजा था, लेकिन असलम ने इंसानियत को तवज्जो देते हुए अपना रोजा तोड़कर रक्तदान किया। एक मुसलमान को अपने परिजन के लिए रमजान होने के बावजूद रक्तदान करता देख रमेश के परिजनों की आंखें कृतज्ञता से डबडबा गईं।
इधर, असलम ने बताया कि वह हर बार रमजान में पूरे रोजे रखते हैं। इस बार भी पूरे रोजे रखने थे, लेकिन इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं हो सकता। असलम कहते हैं कि मुझे फख्र है कि मेरे शरीर में बह रहा खून किसी की जिंदगी बचाने के काम आया। बता दें कि असलम अली के परिवार में पिता हसरत अली, पत्नी जीनत और तीन बच्चे हैं।