सजायाफ्ता फरार कैदी आठ साल बाद गिरफ्तार, 24 साल पहले हुई हत्या के मामले में मिली थी सजा
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24 साल पहले हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके फरार अभियुक्त को पुलिस ने न्यायालय से जारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई अपील खारिज होने के बाद से वह पिछले आठ वर्षों से फरार चल रहा था। सोमवार को पुलिस ने आरोपी को नैनीताल के एडीजे न्यायालय में पेश किया।
21 अगस्त 1995 को शाम करीब साढ़े पांच बजे रेलवे स्टेशन के अस्पताल परिसर में टांडा उज्जैन निवासी शिवकुमार पुत्र नन्हे सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के भाई हरिशंकर की ओर से चैती गांव निवासी गोविंद, आवास-विकास कॉलोनी निवासी प्रदीप चौहान और स्टेशन अधीक्षक रघुवीर सिंह के बेटे राजीव चौहान उर्फ टालू के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
वादी का कहना था कि एक गोविंद ने तहसील के पेशकार की बेटी से कोर्ट मैरिज की थी। जिसे उसने छोड़ दिया था। इस मामले में शिवकुमार गवाह था। गोविंद उस पर गवाही न देने के लिए दबाव बना रहा था।
इंकार करने पर गोविंद ने अपने दो साथियों प्रदीप चौहान और राजीव चौहान की मदद से उसके भाई शिवकुमार की हत्या कर दी। मामले की विवेचना एसआई एनएस त्यागी ने की। आरोपपत्र दायर होने पर वाद का सत्र परीक्षण एडीजे (नैनीताल) की अदालत में हुआ।
सुनवाई के बाद वर्ष 2005 में अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। आरोपियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। 2011 में हाईकोर्ट से तीनों आरोपियों की जमानत मंजूर हो गई।
जमानत पर छूटने के बाद दो आरोपियों राजीव उर्फ टालू और प्रदीप चौहान की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने एडीजे कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।
हत्याकांड में एक मात्र जीवित बचा मुजरिम गोविंद संबंधित न्यायालय में पेश नहीं हुआ। इस दौरान कोर्ट ने उसके खिलाफ कई वारंट भी जारी किए। वह छद्म नाम से हरिद्वार में रह रहा था।
रविवार को एसआई गणेश पांडेय ने मुखबिर की सूचना पर गोविंद को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया। उसे सोमवार को नैनीताल के एडीजे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार फरार चल रहे गोविंद पर आईटीआई और काशीपुर थाने में कई मुकदमे दर्ज हैं। वह आईटीआई थाने का हिस्ट्रीशीटर बताया गया है।