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नकरौंदा कांडः दो-दो अजय, फिर भी पराजय

Sun, 21 Sep 2014 10:01 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 Sep 2014 10:01 AM IST
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murder mystery in nakronda dehradun

अजय यानी जिसे जीता न जा सके। संयोग से दून पुलिस में दो-दो ‘अजय’ (एसएसपी अजय रौतेला, एसपी सिटी अजय सिंह) हैं, लेकिन बदकिस्मती से पराजय उनकी पहचान बनती जा रही है। ताजा उदाहरण नकरौंदा कांड है।

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सहायक कृषि अधिकारी के बेटे अंकित थपलियाल के हत्यारों को पकड़ने के लिए पुलिस ने लोगों से सात दिन की मोहलत मांगी थी। यह समय रविवार को पूरा हो जाएगा, लेकिन पुलिस ठोस सुराग नहीं ढूंढ पाई है।
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10 सितंबर को सुरेंद्र सिंह थपलियाल के घर में डकैती के दौरान बदमाशों ने उनके बेटे अंकित की हत्या कर दी थी। घटना के अगले दिन लोगों ने दून-हरिद्वार हाइवे पर जमा लगा दिया था। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने तीन दिन का समय मांगकर लोगों को शांत किया था।
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इसी दिन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पुलिस को खुलासे के लिए 36 घंटे का समय दिया था। लेकिन पुलिस नाकाम रही तो लोगों ने 14 सितंबर को दोबारा सात घंटे तक हाईवे जाम कर दिया। इस बार पुलिस ने सात दिन की मोहलत मांगी।

टेंशन में पुलिस

murder mystery in nakronda dehradun

एसएसपी और एसपी सिटी को मैदानी क्षेत्रों में तैनाती के दौरान अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का अच्छा अनुभव है। लेकिन इस मामले में उनका अनुभव काम नहीं आ रहा है।

पुलिस ने उत्तराखंड, यूपी, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक के अपराधियों को टटोल चुकी है। अब तक 400 अपराधियों से पूछताछ कर चुकी है। कई प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों से मदद ली जा चुकी है, लेकिन नतीजा जीरो है। इस घटना के बाद मुखबिर तंत्र की कमजोरी एक बार फिर साबित हुई है।

दो बार जाम लगा चुके स्थानीय लोगों की नजर रविवार को पुलिस के जवाब पर है। शनिवार को खुफिया तंत्र नकरौंदा क्षेत्र में भ्रमण कर आंदोलन के इनपुट लेता रहा।

एसएसपी अजय रौतेला और एसपी सिटी अजय सिंह पुलिस टीम के साथ अलग-अलग माथापच्ची कर कुछ संतोषजनक कार्रवाई के प्रयास में जुटे रहे। दोपहर बाद डीआईजी अमित सिन्हा ने भी कार्रवाई की समीक्षा की। उधर, विपक्षी दल भी पुलिस की नाकामी का मुद्दा बनाकर रावत सरकार को घेरने की तैयारी में है।

नकरौंदा कांड बड़ी चुनौती

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व्यापक कार्रवाई के बाद भी पुलिस को कामयाबी नहीं मिल पाई है, लेकिन उसके प्रयासों में कमी नहीं दिखाई देती है। पहले दिन से ही पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। परिजनों की आशंकाओं पर काम करने के साथ सक्रि य गैंग पर भी काम किया गया। वक्त लग सकता है, लेकिन अपराधियों को पुलिस उनके अंजाम तक पहुंचाकर दम लेगी। नकरौंदा की घटना निसंदेह बड़ी चुनौती है।
-अमित सिन्हा, डीआईजी

खुखरी फैक्ट्री पर शिकंजा
नकरौंदा कांड के बाद संदेह के घेरे में आई खुखरी फैक्ट्री भी जांच के दायरे में है। घटना के बाद लोगों ने आरोप लगाया था कि फैक्ट्री के गेट पर हमेशा गार्ड तैनात रहता है, लेकिन उसे बदमाशों के आने-जाने की भनक नहीं लगी। जबकि, फैक्ट्री के बाहर खून के निशान मिले थे। पुलिस ने अब फैक्ट्री के कर्मचारियों की छानबीन शुरू कर दी है। फैक्ट्री में करीब सात सौ कर्मचारी काम करते हैं। इसके लिए अलग टीम बनाई गई है। एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि कुछ लोगों के सत्यापन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है।

जांच के लिए अब नई टीम

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नकरौंदा के लिए बनाई गई सभी टीमों के नाकाम होने पर शनिवार को दूसरे जनपदों से आए निरीक्षकों की नई टीम बनाई गई है। हरिद्वार से आए इंसपेक्टर महेंद्र सिंह नेगी और नैनीताल से संबद्ध हुए कुलदीप असवाल को टीम की कमान दी गई है। यह टीम एसएसपी की निगरानी में मामले की जांच करेगी।

सीबीआई जांच को तैयार पुलिस!
सूत्रों के अनुसार पुलिस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर सकती है। अंकित के परिजन पहले दिन से यह मांग कर रहे हैं। पुलिस इस संबंध में परिजनों और आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों का मन टटोल चुकी है। इसके पीछे मंशा यह है कि संस्तुति प्रक्रिया में पुलिस को 15 से 20 दिन का समय और मिल जाएगा। जबकि, पुलिस अधिकारी यह अच्छी तरह जानते हैं कि सीबीआई ऐसे मामलों को हाथ में नहीं लेती।

ओ पॉजीटिव है घायल बदमाश का ब्लड ग्रुप
डकैती के दौरान एक बदमाश घायल हुआ था, लेकिन कैसे यह अभी तक साफ नहीं हो सका है। आशंका है कि भागते समय बदमाश दीवार पर लगी ग्रिल की चपेट में आ गया था। बदमाश का खून घटनास्थल से थोड़ी दूर खुखरी फैक्ट्री से लेकर चूना फैक्ट्री तक मिला था। जांच में खून ओ पॉजीटिव पाया गया है।

बांग्लादेशियों पर घूमी जांच
पुलिस जांच बांग्लादेशियों के ईद-गिर्द घूम गई है। बावारिया, पादरी, रॉडी आदि जनजाति के अपराधियों के बाद बांग्लादेशी गैंग पर पुलिस ने ध्यान लगाया है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के इलाकों में उन्हें संरक्षण मिलता रहा है। पुराने गैंगों के नंबर खंगालने के साथ कई टीमें उन पर लगाई गई हैं।

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