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निगम की वित्तीय सेहत की पार्षदों को ही खबर नहीं!  

Tue, 12 Apr 2016 03:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 12 Apr 2016 03:58 AM IST
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municipal corporation financial condition.
धन

नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2016-17 का बजट संभवत: अगले सप्ताह कार्यकारिणी बैठक में पेश होगा। हालांकि नगर निगम की कमाई किस किस मद में होगी और खर्च किस मद में यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह पूरी तरह साफ है कि नगर निगम की आय में बहुत इजाफा नहीं होगा।

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आश्चर्य की बात यह है कि नगर निगम की वित्तीय सेहत के बारे में बहुत कम पार्षद ऐसे हैं जिन्हें इसकी जानकारी या रुचि है। इसका नजारा सोमवार को बोर्ड बैठक में देखने को मिला। किसी भी पार्षद ने वित्तीय प्रबंधन पर जरा भी चरचा नहीं की। यह मुद्दा भी नहीं उठाया कि निगम की आय की कमाई कैसे बढ़ेगी।
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निगम की आय वेतन में ही
बता दें कि छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने से नगर निगम का आय का बड़ा हिस्सा वेतन और भत्तों में ही चला जाता है। अब जल्द ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का बोझ निगम पर आएगा। 14 वें वित्त आयोग व राज्य वित्त आयोग के अनुदान के बावजूद हालात बेहतर होने की संभावना नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 में नगर निगम का बजट 145 करोड़ के आसपास रहा।
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कमाई बढ़ाना बड़ी चुनौती
मेयर विनोद चमोली का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष (2016-17) में नगर निगम की खुद की कमाई 20 करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य है। हाउस टैक्स, होर्डिंग शुल्क व कामर्शियल टैक्स से सालाना 20 करोड़ रुपये की कमाई हो जाएगी। हमारा लक्ष्य नगर निगम को वित्तीय तौर पर आत्मनिर्भर करने की है लेकिन यह बड़ी चुनौती है।

वह कहते हैं कि नगर निगम की अपार संपत्तियां हैं। अगर इन बेशकीमती संपत्तियों को ठीक तरह से प्रबंधित कर लिया जाए तो निगम की कमाई बढ़ जाएगी। वह कहते हैं कि जब तक फाईनेंशियल फेडरेलिज्म नहीं आएगा तब तक विभिन्न टैक्सों का हिस्सा हमें नहीं मिलेगा।

 
बेशुमार संपत्तियों का नहीं हो रहा सदुपयोग
नगर निगम के पास हजारों बीघा भू संपत्ति है, लेकिन उनका सदुपयोग नहीं हो रहा है। यदि उनका सदुपयोग किया जाए तो निगम की आय में वृद्घि हो जाएगी। वहीं तमाम परियोजनाओं के लटके होने से भी निगम की आय पर प्रभाव पड़ा है।

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