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ऋषिकेशः चंद्रभागा नदी किनारे बसी अवैध बस्ती की ध्वस्त, 35 सालों से फाइलों में दफन हो रहे थे आदेश

Sun, 08 Sep 2019 10:09 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 08 Sep 2019 10:09 AM IST
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municipal corporation demolish encroachment near Chandrabhaga river after 35 years in rishikesh

ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी किनारे बसी झुग्गी झोपड़ियों को आखिरकार 35 साल बाद नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया है। बरसात के मौसम में चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते हर बार इन झुग्गी झोपड़ियों को गिराने के आदेश होते थे, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण आदेश फाइलों में दबकर रह जाते थे। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब जाकर नगर निगम ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई की है। अफरा तफरी के बीच आखिरकार निगम बस्ती को अतिक्रमणमुक्त करवाने में सफल रहा।

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दूसरी ओर सिर से छत उड़ जाने के बाद अब यहां पर रहने वाले करीब 300 लोगों के सामने आवास का संकट पैदा हो गया है। शनिवार को जब निगम की जेसीबी झुग्गियों पर चल रही थी तो गठरियों और अनाज से भरे टीन के डिब्बों पर बच्चे और महिलाएं अपने वर्षों पुराने आशियाने को ढहते देख रहे थे। हर परिवार के पुरुष अपने आशियाने में पड़े ज्यादा से ज्यादा सामान समेटने की आपाधापी में जुटे रहे। लोगों की भगदड़ और चेहरे पर पसरा भय वर्तमान ही नहीं भविष्य की चिंताओं की बानगी भी कह रहा था।  
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बेघर लोगों को ठौर की तलाश

अतिक्रमण हटाओ अभियान के छठे दिन मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान के नेतृत्व में नगर निगम की टीम मय दो जेसीबी के साथ चंद्रभागा नदी के किनारे बसी अवैध बस्ती पहुंची। नगर निगम की टीम पहुंचते ही बस्ती में अफरातफरी का माहौल मच गया। आनन फानन में लोगों ने अपने घरों का सामान हटाना शुरू कर दिया। देखते-देखते एक घंटे के अंदर सभी लोगों ने अपने घरों का सामान उठाकर एक तरफ रख दिया। अभियान की शुरुआत में कुछ लोगों ने विरोध भी दर्ज करवाने की कोशिश की, लेकिन विरोध की आशंका भांपते ही मौके पर मौजूद एसडीएम प्रेमलाल ने कोतवाली से अतिरिक्त पुलिस फोर्स मंगवा ली। बस्ती के लोगों ने प्रशासन का मूड भांपते हुए चुप्पी साध ली। निगम टीम ने बस्ती के लोगों को अपना सामान सुरक्षित निकालने के लिए मौका भी दिया। इस दौरान चंद्रभागा पुल के नीचे बने कुछ संगठनों के अस्थाई दफ्तरों को भी ध्वस्त कर अतिक्रमण मिटाया गया। टीम ने जेसीबी की सहायता से पुल के नीचे बने अस्थाई निर्माणों सहित करीब 70 झुग्गी झोपड़ियों को ध्वस्त कर नदी को खाली करवा दिया। 

चंद्रभागा नदी के किनारे बसी अवैध बस्ती में लगभग 300 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम प्रशासन ने इस अवैध बस्ती को हटा तो दिया है लेकिन इन लोगों के सामने आवास का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बच्चे और महिलाएं जगह-जगह नदी किनारे सूखी जमीन पर उम्मीद की तलाश कर रहे हैं। आबादी इतनी ज्यादा है कि कोई जनप्रतिनिधि या राजनीतिक शख्सियत झूठा आश्वासन भी नहीं दे पा रहा है कि देर सबेर कहीं ठौर दिलवा देंगे। बेघर हुए लोग भी इस बात से निराश हैं कि मुसीबत की घड़ी में उनका कंधा पकड़कर ढांढस बंधाने वाला कोई नहीं। सबसे दयनीय हालत उन बच्चों की है जिन्हें न जाने कितने दिन खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारनी होगी।

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