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बर्फ से ढकी चोटियां तोड़ेंगी केदारनाथ में सन्नाटा

Tue, 28 Oct 2014 08:20 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 28 Oct 2014 08:20 AM IST
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mountaineering in kedarnath.

कपाट बंद होने के साथ ही केदारनाथ में पसरने वाला सन्नाटा इस बार टूटेगा। नेहरु पर्वतारोहण संस्थान इस बार इसके लिए कोशिश करने जा रहा है।

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हालांकि संस्थान करेगा वही जिसके लिए उसे जाना जाता है। मतलब केदारनाथ को बेस कैंप बनाकर केदार के आसपास की चोटियों पर बर्फ में ट्रैक करने का प्रशिक्षण देने का।
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उत्तराखंड सरकार के केदार पुनर्निर्माण के काम में खासा सहयोग निम या नेहरू पर्वतारोहण संस्थान का है।

नंदा देवी राज जात के ऊंचाई वाले ट्रेक को निम ने ही विपरीत परिस्थितियों में तैयार किया था। बेदनी बुग्याल से लेकर होम कुंड का ट्रेक तैयार करने के लिए निम ने उन लोगों को तैयार किया जो बर्फ और ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सके।

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कपाट बंद होने के बाद करीब 500 लोग मौजूद

mountaineering in kedarnath.

नंदा राज जात की सफलता के बाद अब केदारनाथ में भी निम पर सरकार भरोसा जता रही है। यही वजह है कि निम की टीम के साथ ही करीब 500 लोग केदारनाथ में कपाट बंद होने के बाद भी मौजूद है।

सरकार भी 15 जनवरी तक काम पूरा होने का अनुमान लगा रही है। इस अनुमान के पीछे भी निम की टीम ही काम कर रही है। इससे पहले भी केदार यात्रा की शुरूआत में निम ने ही रामबाड़ा से लेकर केदारनाथ तक के पैदल यात्रा मार्ग को बनाकर दिया था।

पर निम ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अब केदारनाथ को सर्दियों में भी गुजांयमान रखने की तैयारी की है। निम एक खास योजना के तहत हाई अल्टीट्यूड माउंटेनियरिंग प्रशिक्षण के लिए केदारनाथ को ही बेस कैंप बनाने की तैयारी कर रहा है।

ग्लेश्यिर के खिसकने से होने वाले बदलाव पर नजर

mountaineering in kedarnath.

केदारनाथ से त्रिजुगीनारायण, चौमासी सहित कई और ट्रेक हैं और इन रूटों का उपयोग प्रशिक्षण के लिए भी किया जा सकता है।

ऐसे में निम कपाट बंद होने के बाद सुनसान पड़े केदारनाथ को फिर से मानव गतिविधियों के केंद्र में लाने में सफल हो सकता है। इसका एक फायदा और भी है जो निम की योजना का हिस्सा बन सकता है।

सूत्रों के मुताबिक ट्रेकिंग और प्रशिक्षण के बहाने निम केदारनाथ के जल संग्रहण क्षेत्र की पूरी जानकारी को इकठ्ठा कर सकता है। ऐसे में ग्लेश्यिर के पीछे खिसकने से होने वाले बदलाव पर भी निगाह रखी जा सकेगी। केदारनाथ की सुरक्षा के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे सरकार का एक और मकसद है जो पूरा होगा। पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री हरीश रावत इस कोशिश में है कि आपदा के बाद अब उत्तराखंड को सुरक्षित राज्य की छवि वापस लौटाई जा सके। ऐसे में सर्दियों में केदारनाथ के फोकस पर रहने से पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों का विश्वास भी वापस लौट सकेगा।

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