{"_id":"5ac5b47c4f1c1bb5618b5a91","slug":"mountaineer-nandini-want-help-from-uttarakhand-government","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराने वाली नंदिनी UP से निराश, अब उत्तराखंड से आस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराने वाली नंदिनी UP से निराश, अब उत्तराखंड से आस
अलका त्यागी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Apr 2018 04:26 PM IST
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देश-दुनिया की कई दुर्गम और उच्च चोटियों को फतह करने वाली पर्वतारोही ज्ञान नंदिनी के विश्व की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने के अभियान के बीच आर्थिक बाधा खड़ी हो गई है।
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उत्तर प्रदेश के चंदौसी निवासी 27 वर्षीय पर्वरोही दर-दर मदद की गुहार लगा रही है। यूपी में पहले अखिलेश सरकार और फिर योगी सरकार से मदद की गुहार लगाने के बाद जब उसे निराशा हाथ लगी तो वह उत्तर प्रदेश छोड़कर उत्तराखंड आ गई।
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ज्ञान नंदिनी एक अगस्त को यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुश पर तिरंगा फहराकर लौटी हैं। इससे पहले वह अफ्रीका की किलीमंजारो, हिमाचल स्थित त्रूर्ण पर्वत, मनाली के व्यास कुंड, शित्थी धार की चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी हैं।
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इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी ज्ञान नंदिनी की कहानी खासी दिलचस्प है। चंदौसी के फरीदपुर खास गांव की रहने वाली ज्ञान नंदिनी एक साधारण परिवार से हैं। पिता नंदकिशोर एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं।
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माउंट एवरेस्ट फतह करने के उनके सपने के बीच बड़ी बाधा
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चार भाई बहनों में सबसे छोटी ज्ञान नंदिनी ने जब बचपन में पर्वतारोही बनने की ओर कदम बढ़ाए तो परिजनों के साथ ही नाते, रिश्तेदारों का विरोध आड़े आ गया। लेकिन तमाम रोक-टोक के बावजूद उन्होंने लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए। शुरुआती सफलताओं से जब वो अखबारों की सुर्खियां बनीं तो परिजन और रिश्तेदार भी समर्थन में आ गए। फिर एक के बाद एक कई दुर्गम चोटियों को उन्होंने अपने हौसले के सामने बौना कर दिया। लेकिन अब माउंट एवरेस्ट फतह करने के उनके सपने के बीच बाधा खड़ी हो गई।
आर्थिक मदद की गुहार लेकर वो यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से तीन बार मिलीं, लेकिन हर बार महज आश्वासन ही मिला। सरकार बदली तो एक बार फिर उम्मीद जगी, लेकिन कई बार प्रयास करने के बावजूद वो यूपी के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ तक नहीं पहुंच पाईं। आखिरकार वह मदद की उम्मीद लिए उत्तर प्रदेश छोड़कर अब देहरादून पहुंच गई हैं। ज्ञान नंदनी देहरादून में कारगी चौक के पास किराये का कमरा लेकर रह रही हैं। साथ ही वो नेहरू युवा केंद्र के साथ मिलकर बच्चों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
बछेंद्री पाल ने दिया तकनीकी मदद का आश्वासन
एवरेस्ट पर फतह करने वाली भारत की पहली महिला बछेंद्री पाल से भी ज्ञान नंदनी मुलाकात कर चुकी हैं। वो बताती हैं कि बछेंद्री पाल ने उनकी काफी सराहना की है और एवरेस्ट फतह करने के लिए उन्होंने तकनीकि मदद का आश्वासन दिया है। काठमांडू की एशियन ट्रैकिंग कंपनी की ओर से एवरेस्ट की चढ़ाई कराने के लिए ज्ञान नंदनी का चयन कर लिया गया है। उन्हें चयनपत्र देकर मिशन में खर्च होने वाली राशि का बंदोबस्त करने के लिए कहा गया है। इसके लिए उन्हें तीन अप्रैल से सात जून तक का समय दिया गया है। ज्ञान नंदनी बताती हैं कि सिर्फ रुपयों का बंदोबस्त न होने के चलते वह सपने से सिर्फ एक कदम दूर हैं।
आर्थिक मदद की गुहार लेकर वो यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से तीन बार मिलीं, लेकिन हर बार महज आश्वासन ही मिला। सरकार बदली तो एक बार फिर उम्मीद जगी, लेकिन कई बार प्रयास करने के बावजूद वो यूपी के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ तक नहीं पहुंच पाईं। आखिरकार वह मदद की उम्मीद लिए उत्तर प्रदेश छोड़कर अब देहरादून पहुंच गई हैं। ज्ञान नंदनी देहरादून में कारगी चौक के पास किराये का कमरा लेकर रह रही हैं। साथ ही वो नेहरू युवा केंद्र के साथ मिलकर बच्चों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
बछेंद्री पाल ने दिया तकनीकी मदद का आश्वासन
एवरेस्ट पर फतह करने वाली भारत की पहली महिला बछेंद्री पाल से भी ज्ञान नंदनी मुलाकात कर चुकी हैं। वो बताती हैं कि बछेंद्री पाल ने उनकी काफी सराहना की है और एवरेस्ट फतह करने के लिए उन्होंने तकनीकि मदद का आश्वासन दिया है। काठमांडू की एशियन ट्रैकिंग कंपनी की ओर से एवरेस्ट की चढ़ाई कराने के लिए ज्ञान नंदनी का चयन कर लिया गया है। उन्हें चयनपत्र देकर मिशन में खर्च होने वाली राशि का बंदोबस्त करने के लिए कहा गया है। इसके लिए उन्हें तीन अप्रैल से सात जून तक का समय दिया गया है। ज्ञान नंदनी बताती हैं कि सिर्फ रुपयों का बंदोबस्त न होने के चलते वह सपने से सिर्फ एक कदम दूर हैं।