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उत्तराखंड: मौत बना अंगीठी का धुआं, मां-नवजात समेत तीन जिंदगियां निगली

Mon, 16 Jan 2017 12:15 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नारायणबगड़/उत्तरकाशी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नारायणबगड़/उत्तरकाशी Updated Mon, 16 Jan 2017 12:15 PM IST
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mother with new born died by Brazier smoke.
अंगीठी - फोटो : Demo Pic

उत्तराखंड में अंगीठी के धुएं में दम घुटने से महिला और उसके नवजात बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है। 

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पहली घटना चमोली जिले के नारायणबगड़ विकासखंड के कंसोला गांव की है, जहां शनिवार रात महिला रंजू देवी (25) अपने नवजात बेटे और सास के साथ कमरे में अंगीठी जलाकर सो रही थी।
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सुबह जब महिला का पति प्रवीन कमरे में गया तो रंजू और नवजात मृत पाए गए। वहीं, महिला की सास की हालत गंभीर बनी हुई है। नवजात का मकर संक्रांति के दिन ही नामकरण हुआ था। घटना से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।

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सुबह दरवाजा खोला तो पत्नी और बेटे की हो चुकी थी मौत

mother with new born died by Brazier smoke.
मौत - फोटो : Demo Pic

प्रवीन ने बताया कि शनिवार को मौसम ठंडा होने के चलते उन्होंने रात को अंगीठी जला दी। सुबह जब वह बच्चे के लिए दूध गर्म करके ले गया तो उसकी मां बेहोशी की हालत में अचानक नीचे गिर गई, जबकि उसकी पत्नी और बेटा मृत मिले।

बताया जा रहा है कि रंजू देवी का यह पहला बच्चा था, जो डेढ़ महीने पहले ही हुआ था। सूचना पर राजस्व उपनिरीक्षक पंकज सजवाण गांव पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद रविवार को मींग गदेरे में पिंडर नदी के किनारे अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दूसरी घटना में उत्तरकाशी जिले के हर्षिल में जड़ी-बूटी नर्सरी के चौकीदार महेंद्र (37) और उनकी पत्नी रात को अपने कमरे में अंगीठी में कोयले जलाकर सोए थे। सुबह देर तक नर्सरी में न दिखने पर कुछ लोग उसके कमरे में गए, तो चौकीदार मृत पाया गया और उसकी पत्नी बेहोश थी। स्थानीय लोगों ने उसकी पत्नी को सेना के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार चल रहा है। 

शुक्रवार रात भी युवक की हुई थी मौत

mother with new born died by Brazier smoke.
अंगीठी के धुएं से बेहोश युवक - फोटो : AmarUjala

चमोली जिले के घाट ब्लाक के बांसवाड़ा गांव में भी शुक्रवार रात को अंगीठी के धुएं में दम घुटने से एक 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी और दो अन्य युवक अपना होश खो बैठे थे। जिन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ा था।

बंद कमरे में अंगीठी न जलाएं
सीएमआई के सीनियर फिजिशियन डा. विमल नौटियाल का कहना है कि एक तो बंद कमरे में अंगीठी रख कर कतई न सोएं। अगर बहुत ज्यादा जरूरत है तो अंगीठी बाहर जलाएं जिससे धुआं बाहर ही रहे और जब कोयला लाल हो जाए तो कमरे में लाएं।

इसके साथ ही कमरे की खिड़की और रोशनदान खुला रखें जिससे अंदर की हवा बाहर और बाहर की अंदर आती रहे। उन्होंने बताया कि बंद कमरे में अंगीठी जलाने से कार्बन मोनोआक्साइड बनती है जिससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है, सांस रुक जाती है और आखिर में मौत हो जाती है।

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