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बेटे का मुंह देख दान कर दी बेटी की आंखें

Sun, 29 Dec 2013 06:04 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 29 Dec 2013 06:04 PM IST
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mother donate her daughter eye for son

चंपा एक बार चिरनिद्रा में सोई अपनी बेटी के चेहरे को निहारती और एक बार उन लोगों की तरफ देखती जो उसे बेटी की आंखें दान करने से मना कर रहे थे। फिर उसे अपने नेत्रहीन बेटे का ख्याल आया और उसका हौसला फौलाद हो गया।

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उसने हिमालयन इंस्टीट्यूट के नेत्ररोग विभाग को फोन करवाया कि डाक्टर आकर उसकी बेटी के शव से नेत्र सुरक्षित कर लें।

बेटी को था ब्लड कैंसर
एफआरआई कालोनी में तिलखवाल परिवार रहता है। नारायण सिंह तिलखवाल के दो बेटे हैं और एक बेटी। बड़ा गोपाल एफआरआई में दिहाड़ी पर काम करता है। मझला बेटा संदीप (21) नेत्रहीन है। बेटी स्वाती कक्षा 11 की छात्रा थी।
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डेढ़ महीने पहले जांच में बेटी को ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई थी। शनिवार को उसकी मौत हो गई। स्वाती की मां चंपा को उनके पड़ोसी जितेंद्र यादव ने सलाह दी कि मरणोपरांत स्वाती के नेत्रदान कर दें।
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रिश्तेदार कर रहे थे मना
इस पर चंपा के कुछ रिश्तेदार उसे मना करने लगे। चंपा ने रिश्तेदारों की एक न मानी और कहा कि अगर व्यक्ति के मरने के बाद उसकी आंखों से किसी की जिंदगी रोशन हो तो अच्छा है। हो सकता है कि उसके बेटे को भी आंखें मिल जाएं।


चंपा ने बेटी के मरणोपरांत नेत्रदान का फैसला ले लिया। हिमालयन इंस्टीट्यूट के अस्पताल के नेत्ररोग विभाग की आई बैंक प्रभारी डा. नीती गुप्ता ने नेत्र सुरक्षित कर लिए।

उन्होंने बताया कि संदीप पिलखवाल की जांच की जाएगी। अगर कार्नियल अंधता है तो उसे प्रमुखता के आधार पर कार्निया प्रत्यारोपण कर दिया जाएगा।

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