उत्तराखंड की गुफाओं से निकला मानसून का सबसे लंबा रिकॉर्ड
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आज जिस हिमालयी क्षेत्र को आप हरा-भरा देख रहे हैं, उसमें पूरे दो हजार साल तक भयंकर सूखा पड़ा था और इस सूखे ने भारत ही नहीं एशिया के कई देशों में वनस्पतियों को सुखाकर रख दिया था।
ऐसा नहीं कि मानसून का मूड अचानक बिगड़ा था। सूखा पड़ने के साढ़े सत्रह हजार साल पहले से ही मानसून ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया था। मानसून के मिजाज का यह सच पता चला है उत्तराखंड और मेघालय की 50 गुफाओं के चूना पत्थर की परतों के अध्ययन से।
भारत और अमेरिका के विज्ञानियों की संयुक्त टीम ने पहली बार गुफाओं के चूना पत्थर के माध्यम से मानसून का अब तक का सबसे लंबा साढ़े पैंतीस हजार साल का रिकॉर्ड खोज निकाला है। गुफाओं में जमी लाइम स्टोन की परतों से हिमालयी क्षेत्र में हजारों साल पहले के मानसून की स्थिति खोजने का काम वर्ष 2013 में शुरू किया गया था।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, देहरादून के निदेशक डॉ. अनिल कुमार गुप्ता की अगुवाई में अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों की टीम ने गुफाओं के चूना पत्थर की परतों के अध्ययन की शुरुआत मेघालय की मामलुह गुफा से की थी। इसके बाद मेघालय और उत्तराखंड की 50 गुफाओं के लाइम स्टोन की परतों का अध्ययन किया गया।
अब अंडमान निकोबार और हिमाचल की गुफाओं का अध्ययन
गुफाओं के इस अध्ययन में विज्ञानियों ने पाया कि 33,500 से 35,500 साल पहले इस क्षेत्र में मानसून अच्छा था, लेकिन इसके बाद स्थिति बिगड़ती गई। लाइम स्टोन की परतों से पता चला कि प्रत्येक हजारवें साल मानसून कमजोर होता गया और 17,000 साल पहले हिमालयी क्षेत्र में सूखे की शुरुआत हुई जो दो हजार साल तक चली।
लंबे सूखे के बाद मानसून ने अपनी चाल सुधारनी शुरू की और हरियाली आती गई। उसके बाद फिर कभी मानसून का मूड ऐसा कभी नहीं बिगड़ा। विज्ञानियों की टीम ने इन दोनों प्रांतों की गुफाओं के लाइम स्टोन का अध्ययन पूरा करने के बाद अब अंडमान निकोबार और हिमाचल प्रदेश की गुफाओं का अध्ययन शुरू किया है।
गुफाओं के लाइम स्टोन की स्टडी करके मानसून और वर्षा का अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड निकाला गया है। उत्तराखंड और मेघालय का अध्ययन हो गया है। अब अंडमान निकोबार, हिमाचल प्रदेश आदि क्षेत्रों की गुफाओं के लाइम स्टोन की जांच की शुरुआत की गई है।
- डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, निदेशक वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान
खास तथ्य
- लाइम स्टोन की परतों की जांच के लिए स्पीलियोदेम तकनीक अपनाई गई
- लाइम स्टोन को सीधा काटने के बाद हल्की धारियों से हर पांच मिमी के बाद सैंपल लिया
- लाइम स्टोन सैंपल की स्टेबिल आइसोटोप एनालाइजर मास स्पेक्ट्रोमीटर से वर्षा की स्थिति की जांच देहरादून में हुई
- यूरेनियम-थोरियम टाइम सीरीज एनालिसिस से सालों की स्थिति अमेरिका में निकाली गई