कांवड़ यात्रा पर आतंकी साया, ड्रोन से चप्पे-चप्पे पर निगरानी
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हरिद्वार में कांवड़ लेने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। तीन दिनों में 44 लाख शिव भक्त कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंच चुके हैं। पुलिस एवं प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। हरकी पैड़ी की ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
15 जुलाई के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना के मद्देनजर हरिद्वार एवं आसपास का रूट डायवर्जन का मैप तैयार कर लिया गया है।
एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा के मुताबिक कांवड़ यात्रा के चलते हरिद्वार अतिसंवेदनशील है। हरिद्वार में चप्पे चप्पे पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध व्यक्तियों की पूरी तरह निगरानी कर रही हैं।
उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर दोनों ही प्रदेशों की पुलिस संयुक्त चेकिंग कर रही है। चेक पोस्ट पर कांवड़ियों के वाहनों से डीजे उतारे जा रहे हैं। लाठी-डंडे और त्रिशूल भी जब्त किए जा रहे हैं।
पंचम के बाद कांवड़ियों की संख्या बढ़ेगी। तीन दिनों में कांवड़ियों की संख्या 44 लाख पार हो चुकी है। 21 जुलाई तक साढ़े तीन करोड़ से अधिक शिव भक्त पहुंचने की संभावना है। एडीजी के मुताबिक हरकी पैड़ी की निगरानी ड्रोन की जा रही है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ड्रोन भी बड़ाए जाएंगे।
15 जुलाई से होगा रूट डायवर्ट
आवश्यक सेवाएं नहीं होंगी बाधित
एडीजी ने कहा कि रूट डायवर्जन होने के बाद आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को नहीं रोका जाएगा। गैस, पेट्रोल-डीजल, दूध और अखबार वाली गाड़ियों की आवाजाही बाधित नहीं की जाएगी। ये वाहन रोजाना की तरह अपने रूट पर चलेंगे।
15 जुलाई से होगा रूट डायवर्ट
राम सिंह मीणा के मुताबिक रूट डायवर्जन का मैप तैयार हो चुका है। 15 जुलाई की रात से इसे प्रभावी कर दिया जाएगा। बिजनौर से देहरादून के लिए आवाजाही करने वाले वाहनों रूट चीला-ऋषिकेश होगा। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से आने वाले वाहन नारसन होकर आवाजाही करेंगे।
आखिरी दो दिन होंगे मुश्किल
21 जुलाई को कांवड़ यात्रा खत्म हो जाएगी। 19 और 20 जुलाई को कांवडियों का सैलाब उमड़ने से यातायात के साथ कानून-व्यवस्था नियंत्रित करने में पुलिस फोर्स को पसीना बहाना पड़ेगा। आखिरी दो दिनों में पश्चिमी उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के नजदीकी जिलों के कांवड़िये वाहनों से हरिद्वार पहुंचेंगे।