फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   money back of sugarcane farmer uttarakhand.

पाई-पाई को तरसेगा गन्ना किसान

Wed, 26 Nov 2014 12:56 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 26 Nov 2014 12:56 PM IST
विज्ञापन
money back of sugarcane farmer uttarakhand.

उत्तराखंड में किसानों की गन्ने की फसल पककर तैयार है, लेकिन सरकार न तो अब तक गन्ने का समर्थन मूल्य तय कर पाई है और न ही किसानों को पिछले पेराई सत्र का बकाया 224 करोड़ रुपए का भुगतान हो पाया है।

विज्ञापन


दो सप्ताह में भुगतान कैसे होगा
ऐसे में मुख्यमंत्री की 15 दिन के भीतर गन्ना भुगतान की घोषणा हवाई साबित होने जा रही है। किसानों का कहना है कि रेट ही तय नहीं हुआ तो दो सप्ताह में भुगतान कैसे होगा।
विज्ञापन


उत्तराखंड में किच्छा और डोईवाला चीनी मिलों को छोड़ दें तो किसी भी मिल ने पिछले पेराई सत्र का भुगतान अब तक नहीं किया है। वर्ष 2012-13 से प्रदेश में न तो गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई है न ही किसानों को समय पर गन्ने की फसल का भुगतान हो पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतना ही नहीं सरकार गन्ना मूल्य न बढ़ाए इसके लिए इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन ने पेराई शुरू न का दबाव चीनी मिलों पर बनाया हुआ है। यही वजह है कि नादेही चीनी मिल को छोड़कर प्रदेश की अन्य आठ मीलों में अब तक पेराई शुरू नहीं हो पाई है।

जबकि किसानों की गन्ने की फसल पककर तैयार है और कुछ क्षेत्रों में किसान गन्ना की फसल की कटाई न हो पाने से गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।

किस चीनी मिल पर कितना बकाया
चीनी मिल - बकाया (लाख रुपए में)
सीतारगंज - 1298.63
बाजपुर - 1391.89
गदरपुर - 878.96
नादेही - 1199.82
लीबरहेडी - 5778.23
इकबालपुर - 5955.74
लक्सर - 3515.49

मिल बंद, भुगतान बाकी
काशीपुर चीनी मिल पर 2007-08 का 117.94 लाख और 2011-12 का 2374.36 लाख रुपए बकाया है। जबकि चीनी मिल बंद हो चुकी है। इस मिल को गन्ना देने वाले किसान अब भुगतान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।


गन्ने का रेट शासन को तय करना है। प्रदेश में मात्र दो चीनी मिलों को छोड़कर किसी भी चीनी मिल ने किसानों के पिछले बकाये का शत प्रतिशत भुगतान नहीं किया।
- डॉ. योगेंद्र पाल, उप आयुक्त गन्ना एवं चीनी

किसानों को सामान्य प्रजाति का 285 रुपए और अगेती का 295 प्रति क्विंटल रेट दो साल पहले मिलता था, लेकिन पिछले दो साल से न तो रेट बढ़ा न किसानों को बकाया भुगतान मिला। हालत यह है कि किसान बच्चों की फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं।
- दरबान बोरा, उप सभापति किसान सेवा सहकारी गन्ना समिति

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed