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विदाई गीत सुने बिना बाय-बाय कर गए मोदी
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 16 Dec 2013 05:03 PM IST
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रैली में पारंपरिक उत्तराखंडी नृत्य के जरिये मोदी को विदाई देने की तैयारी की गई थी। भाजपा ने उत्तरकाशी के नौगांव से 11 महिलाओं को बुलाया था। एक दिन पूर्व ही ये महिलाएं पूरी तैयारी के साथ दून पहुंच गई थीं। रैली शुरू होने से पहले ही वे मंच के पास बैठ गई थीं। उन्हें इंतजार था मोदी के संबोधन का, जिसके बाद उन्हें विदाई गीत और नृत्य करना था। लेकिन मोदी भाषण समाप्त करने के तुरंत बाद बाय-बाय कर गए।
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मंच से न तो उन्हें नृत्य के लिए बुलाया गया, न ही प्रस्तुति न होने की कोई वजह बताई गई। इससे पारंपरिक वेशभूषा में सजी इन महिलाओं के हाथ निराशा ही लगी। हालांकि, बाद में खाली हो चुके मैदान में ही उन्होंने मन रखने के लिए नृत्य किया।
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जताई नाराजगी
नौगांव की ललिता ने कहा कि वे पारंपरिक वेशभूषा में इसीलिए आई थीं कि नृत्य के जरिये उत्तराखंडी संस्कृति की झलक पेश करेंगी। भाजपा वाले पहले बता देते तो वे सामान्य वेश में ही आतीं। प्रेमा रावत ने कहा कि महिलाएं घाघरा, खिलका, टाला, तिमण्या आदि पहनकर आई थीं, लेकिन सब धरा रह गया। शहना ने बताया कि वे पार्टी से नाराज हैं, लिहाजा पूरी टीम किसी नेता से बात किए बिना निकल गई। कृष्णा, मोना, दर्शनी ने भी नाराजगी जताई।
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पिछोड़ा पहन पहुंची महिलाएं
पिछोड़ा (विशेष चुनरी) कुमाऊंनी संस्कृति का अभिन्न अंग है। वहां शादी, समारोह या किसी विशेष आयोजन में महिलाएं पिछोड़ा ओढ़ती हैं। रैली के दौरान अल्मोड़ा से आई कई महिलाएं पिछोड़ा ओढ़कर आई थीं। रमा जोशी ने बताया कि पहाड़ की संस्कृति दिखाने के लिए महिलाएं इस अंदाज में पहुंची।
कपूर ने मांगी माफी
रैली संयोजक हरबंस कपूर ने क्षमा मांगते हुए कहा कि व्यस्तता और समय की कमी के चलते महिलाओं को मंच पर मौका नहीं दिया जा सका। कपूर ने कहा कि पार्टी की कोशिश थी कि मोदी को पहाड़ी संस्कृति से रूबरू कराएं। यही वजह थी कि उन्हें पहाड़ी टोपी और बदरीनाथ मंदिर का माडल भेंट किया गया।