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मोदी इफेक्ट से हल हुआ भारत-नेपाल सीमा पर बनने वाली सड़क का मामला

Wed, 09 May 2018 09:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 09 May 2018 09:57 PM IST
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modi effect on india nepal border road metter
Narendra Modi Nepal Tour

सड़क निर्माण और दूसरे विकास कार्यों के लिए अकसर वन भूमि हस्तांतरण में महीनों-साल लग जाते हैं, लेकिन कुमाऊं के चंपावत जिले में भारत- नेपाल सीमा पर बनने वाली सड़क के लिए यह काम महज 22 घंटे में हो गया।

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इससे पहले शायद ही ऐसा हुआ हो कि एक सड़क के लिए राज्य से लेकर केंद्र के अधिकारी रातभर जागकर काम करें और सुबह होते ही जमीन हस्तांतरण के आदेश जारी हो जाएं। सरकारी महकमों की इस तेजी के पीछे ‘मोदी इफेक्ट’ बताया जा रहा है। 
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चंपावत जिले में टनकपुर बैराज से मटेना (नेपाल सीमा) तक करीब डेढ़ किमी सड़क निर्माण का मामला लंबे समय से लंबित है। लोक निर्माण विभाग इस सड़क को बना रहा है। नेपाल की तरफ से आने वाली सड़क तेजी से बन रही है।
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अब जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल दौरे पर जाने वाले हैं। ऐसे में सड़क को लेकर तेजी आई है। सात मई को शासन और वन मुख्यालय के पास संबंधित जगह पर सड़क बनाने के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश उच्च स्तर से पहुंचा। 

करीब सात करोड़ का खर्च आने का अनुमान

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इसके बाद सात मई को सुबह 10 बजे ही अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शाम चार बजे से नोडल कार्यालय वन भूमि हस्तांतरण, देहरादून ने सड़क के लिए जरूरी 2.34 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रिया (ऑनलाइन) को शुरू किया गया।

इसके बाद रात भर में चंपावत वन प्रभाग, तराई केंद्रीय वन प्रभाग, हल्द्वानी के अधिकारियों ने भूमि से जुड़े अभिलेख, नक्शे जुटाने के साथ अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरा कर दिया। आठ मई की सुबह आठ बजे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन भूमि देने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी। 

वन भूमि हस्तांतरण के लिए दी जाने वाली भूमि भले ही कम हो, लेकिन विभागों ने बेहतर समन्वय, परिश्रम के साथ काम करते हुए बहुत ही कम समय में सड़क के लिए जमीन उपलब्ध कराने का काम किया है। वन भूमि हस्तांतरण में सभी नियम, मानकों का पालन किया गया है।
- जयराज, प्रमुख वन संरक्षक

22 घंटे के भीतर ही लोक निर्माण विभाग को जमीन मिल गई है। सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया को भी शुरू कर दिया गया है। इसमें करीब सात करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। यह राशि विदेश मंत्रालय राज्य सरकार को उपलब्ध कराएगा।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग
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