उत्तराखंडः केंद्र के इस फैसले से खुलेंगे रोजगार के द्वार
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केंद्र सरकार ने देश में विकसित किए जा रहे सौ मॉडल नेशनल करियर सेंटर में से दो सेंटर उत्तराखंड के लिए मंजूर किये हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्री बंदारु दत्तात्रेय ने प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने का आग्रह भी किया है। केंद्र सरकार करीब 380 करोड़ रुपए की लागत से इन केंद्रों को विकसित कर रही है।
मंगलवार को दून में मीडिया से मुखातिब केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेशनल करियर सेंटर के जरिये रोजगार खोज रहे लोगों को 164 से अधिक ट्रेड में रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। नेशनल सर्विस पोर्टल जुलाई माह में शुरू किया जा चुका है।
इसी के तहत देश में करीब सौ आदर्श केंद्र भी स्थापित किये जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने करीब 380 करोड़ रुपए का बजट रखा है। आदर्श केंद्र रोजगार मेले भी आयोजित करेगा, सेवा प्रदाताओं को बेरोजगारों से जोड़ेगा, करियर के लिए परामर्शदात्री संस्था के रूप में भी काम करेगा और कौशल विकास के रास्ते भी सुझाएगा।
दत्तात्रेय के मुताबिक देश में करीब चार करोड़ लोग हर साल रोजगार के लिए तैयार होते हैं। इसके बावजूद योग्यता और कौशल वाले सेक्टर में पर्याप्त खाली जगह है। इसीलिए कौशल विकास को तवज्जो दी रही है। आदर्श केंद्रों को रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास से भी जोड़ा गया है।
चिकित्सा शिक्षा में काम नहीं कर रहा है श्रम मंत्रालय
वहीं, केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अब इएसआई मेडीकल कॉलेजों से हाथ खींच लिए हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक श्रम मंत्रालय ने माना है कि कार्मिकों को चिकित्सीय सुविधाएं देना जरूरी है। श्रम मंत्रालय चिकित्सा शिक्षा में काम नहीं कर रहा है।
लिहाजा जहां मेडीकल कालेज बन चुके हैं, वहां राज्य सरकारों से कहा जा रहा है कि वे खुद इनका संचालन करें। जहां निर्माणाधीन हैं, वहां पीपीपी मॉडल देखा जा रहा है। साफ है कि प्रदेश में हरिद्वार में प्रस्तावित मॉडल इएसआई मेडीकल कालेज का मामला भी अधर में लटक सकता है।
श्रम सुधार पर विधेयक शीतकालीन सत्र में
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक केंद्र सरकार उद्योग जगत की प्रत्याशा को देखते हुए श्रम सुधार में तेजी से आगगे बढ़ रही है। शीतकालीन सत्र में बोनस संशोधन विधेयक, बाल श्रम संशोधन विधेयक, स्मॉल फेक्ट्री विधेयक आदि लोक सभा में पेश किए जाएंगे।
श्रम मंत्रालय ने पाया कि श्रमिकों से संबंधित करीब 44 केंद्रीय कानून हैं। इन सभी को पिरो कर चार कोड के रुप में दो अधिनियम तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से दो विधेयक शीतकालीन सत्र में लोक सभा में लाए जाएंगे।
स्मॉल फेक्ट्री अधिनियम में श्रमिकों और सेवा प्रदाताओं केलिए पंजीकरण और बैंक अकाउंट अनिवार्य किया गया है। श्रम मंत्रालय की कोशिश है कि श्रम कानूनों की जटिलता समाप्त हो पर श्रमिकों के हित प्रभावित न हों।