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सीएम रावत की दुग्ध प्रोत्साहन योजना को झटका

Tue, 02 Feb 2016 01:37 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 02 Feb 2016 01:37 PM IST
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Milk Promotion Plan in uttarakhand.

उत्तराखंड में शुरू की गई गंगा गाय महिला डेयरी योजना शुरूआती दौर में ही लड़खड़ा गई है। योजना के तहत दून में 255 समितियों में से 200 समितियों की इतनी ही महिलाओं को इस बार लाभान्वित करने के प्रस्ताव के विपरीत केवल 20 गायों के लिए ही बजट मिल पाया है।

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दूसरी ओर, मुख्यमंत्री की दुग्ध प्रोत्साहन योजना को भी झटका लगा है। इस योजना के तहत किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पिछले पांच महीने से नहीं मिल पाई है। प्रदेश सरकार की ओर से पांच सितंबर 2015 को दून के रायपुर ब्लॉक से गंगा, गाय, डेयरी महिला योजना की शुरूआत की गई, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
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दून जनपद में ही 398 दुग्ध समितियों में से 255 सक्रिय हैं, लेकिन केवल 20 समितियों के लिए ही धनराशि मिल पाई है। आंचल डेयरी के प्रधान प्रबंधक एसएस पाल के मुताबिक 20 महिला समितियों को इस सप्ताह योजना से लाभान्वित किया जाएगा।
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जबकि इतनी ही अन्य समितियों को इस साल के अंतिम माह तक लाभान्वित करेंगे। उन्होंने कहा कि योजना के संबंध में प्रस्ताव 200 समितियों के लिए भेजा गया था, लेकिन मात्र 20 गायों के लिए ही धनराशि मंजूर हुई।

यह है योजना
गंगा गाय महिला डेयरी योजना के तहत एक दुधारू गाय के लिए, जिसकी कीमत और परिवहन लागत 52 हजार रुपये है, 27 हजार रुपये सरकार अनुदान देती है। जबकि 20 हजार रुपये बैंक से ऋण मिलता है। शुरूआत में किसान को अपनी जेब से केवल पांच हजार रुपये लगाने होते हैं। योजना से केवल दुग्ध समितियों को ही लाभान्वित किया जाना है।

किसी को चार तो किसी को एक भी नहीं
गंगा गाय महिला डेयरी योजना से वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिन 47 समितियों को लाभान्वित किया गया, इसमें भी कुछ गांवों की चार-चार समितियां लाभान्वित हुई हैं। वहीं, अधिकतर गांवों की एक भी समितियों को इसका लाभ नहीं मिला है।

58 वर्ष बाद भी आधुनिक नहीं हो पाई डेयरी
13 फरवरी 1968 में न्यूजीलैंड की मदद से स्थापित रायपुर की आंचल डेयरी का आधुनिकीकरण नहीं हो पाया है। जबकि इस डेयरी से जिले के 15,152 किसान जुड़े हैं। उस समय यहां पांच हजार लीटर के प्लांट का उद्घाटन न्यूजीलैंड के कृषि व विज्ञान मंत्री बीई टॉल बाइज ने किया था। इसके बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर 20 हजार की गई, लेकिन डेयरी का अब भी आधुनिकीकरण नहीं हो पाया है। प्लांट का भवन जर्जर हाल है और पूरे भवन में सीलन है।

शिलान्यास का पत्थर लगाकर भूली सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने रायपुर डेयरी को मॉडल डेयरी का रूप दिया जा सके इसके लिए मॉडल डेयरी निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था, लेकिन दो साल बाद भी शिलान्यास के पत्थर से आगे काम नहीं बढ़ पाया।


एनएमजी से आ रहा पांच हजार लीटर दूध
प्रदेश में दुग्ध विकास समितियों को बढ़ावा देने के दावों के बावजूद खपत के अनुरूप दूध का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि आंचल डेयरी में हर रोज पांच हजार लीटर दूध नेशनल मिल्क ग्रिड के जरिये सहारनपुर और बिजनौर से आ रहा है। डेयरी मैनेजर नीरज कुमार के मुताबिक डेयरी में प्रतिदिन विभिन्न जनपदों से 15 हजार लीटर दूध आ रहा है।

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