उत्तराखंड के जंगलों में भारत-अमेरिका का युद्धाभ्यास
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भारत और अमेरिकी सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास बुधवार से उत्तराखंड के चौबटिया के जंगलों में शुरू हो गया है। रानीखेत से करीब दस किमी दूर चौबटिया के गरुड़ मैदान में दोनों देशों के सैनिकों ने अधिकारियों को भव्य मार्चपास्ट के माध्यम से सलामी दी। इस दौरान दोनों देशों का ध्वजारोहण हुआ।
15 दिनों तक भारत और अमेरिका के 500 सैनिक चौबटिया के जंगलों में आतंकवाद और आंतरिक विद्रोह से निपटने के लिए युद्ध कला की तकनीकों को साझा करेंगे।
अमेरिकी सैन्य दल का प्रतिनिधित्व अमेरिकी इंफेंट्री डिवीजन तथा भारतीय दल का प्रतिनिधित्व गरुड़ डिवीजन की पर्वतीय ब्रिगेड ने किया।
मध्य कमान की तरफ से मेहमानों का स्वागत किया गया। अभ्यास के दौरान तकनीकी युद्ध कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के सैनिकों को जहां संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के अभियानों के दौरान मिलने वाली दुश्मनों की धमकियों को विफल करने की योजना बताई जाएगी वहीं तकनीकी युद्ध कौशल के माध्यम से सैनिकों को सशक्त बनाया जाएगा
15 दिन तक रणक्षेत्र बनेंगे चौबटिया के जंगल
संयुक्त युद्धाभ्यास के चलते चौबटिया क्षेत्र के घने जंगल 15 दिनों के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गए हैं। आतंकवादी घने जंगलों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इसी वजह से युद्धाभ्यास के लिए भी जंगल को चुना गया है।
भारतीय और अमेरिकी सैनिक आतंकवादियों को उन्हीं की रणनीति के तहत घेरने के लिए छद्म (छल) युद्ध के तरीके भी सीखेंगे। क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक मेहमान अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना की तरफ से पूरे इलाके का घेरा मजबूत बना रखा है। चप्पे-चप्पे पर सेना के जवान तैनात हैं।
सूत्र बताते हैं कि अमेरिका में घने जंगलों का अभाव है इसीलिए संयुक्त युद्धाभ्यास के लिए भारत में रानीखेत के चौबटिया सैन्य क्षेत्र को चुना गया। क्योंकि यहां का जंगल इस महत्वपूर्ण अभ्यास के लिए बेहतर है। दोनों देशों के सैनिक आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले विशेष हथियारों, विस्फोटकों, आईईडी डिटेक्टर तथा आधुनिकसंचार उपकरणों को लगाने और इस्तेमाल करने के तरीके भी सीखेंगे।
आर्केस्ट्रा की धुनों पर झूमते दिखे अमेरिकी सैनिक
भारत और अमेरिकी सैनिकों के संयुक्त युद्धाभ्यास का आगाज बेहद दोस्ताना अंदाज में हुआ। अमेरिकी और भारतीय सैनिक एक दूसरे से बेहद आत्मीयता के साथ मिले। सैनिक यादों को कैमरों में कैद करते नजर आए।
9 गोरखा रेजीमेंट के आर्केस्ट्रा की धुनों पर कई अमेरिकी सैनिक अपने वतन से दूर दोस्ताना संबंध को पूरी शिद्दत के साथ निभाते दिखे। इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों को अलग-अलग ग्रुपों में बांटकर अभ्यास के लिए रवाना किया गया। 28 सितंबर को इन सैनिकों के बीच भव्य ड्रिल होगी।
उत्साहित हैं दोनों देशों के जवान
चौबटिया के गरुड़ मैदान में अमेरिका के सैनिक खासे उत्साहित नजर आए। भारत के 9जीआर के जवानों के पास अमेरिकी सैनिकों ने खुखुरी (धारदार हथियार) देखी तो जवान से इसी के इस्तेमाल के तरीके सीखने लगे।
दोनों देशों के सैनिक बेहद दोस्ताना मूड में एक दूसरे के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर रहे थे। युद्धाभ्यास के लिए अमेरिका की विभिन्न बटालियनों से 250 सैनिक और अधिकारी पहुंचे हैं और इतने ही भारत से हैं। अमेरिका से कई महिला जवान और अधिकारी भी पहुंची हैं।
अमेरिकी जवानों को पसंद आए पकौड़े
संयुक्त युद्धाभ्यास के लिए पहुंचे अमेरिकी सैनिकों को भारतीय खाना बहुत पंसद आया। कहा कि उन्होंने अमेरिका में जिस लजीज भारतीय व्यंजनों के बारे में सुना था, आज खाने पर ठीक वैसा ही महसूस हुआ है। सैनिक पैरी ने कहा कि पकौड़ा उन्हें बहुत पसंद आया।
सैनिकों से मिले कर्नल रेडमांडो
अमेरिकी सैन्य दल में शामिल कर्नल रेडमांडो ने भी भारतीय सैनिकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सैनिक बेहिचक अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में विचार साझा कर सकते हैं, क्योंकि वह भी बतौर जवान सेना में भर्ती हुए और अपनी मेहनत से आज कर्नल के पद पर हैं।
विशेषज्ञ की राय
दक्षिण एशिया विश्व के सामरिक महत्व का केंद्र बने होने के कारण पूरे विश्व की नजरें भारत पर हैं। चीन और पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ने से हालात और गंभीर बन रहे हैं। संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास को इसीलिए भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भारत और अमेरिका का यह संयुक्त युद्धाभ्यास इसी कूटनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।
-सेवानिवृत्त ले. जनरल मोहन भंडारी, रक्षा मामलों के जानकार।