{"_id":"6a10fb381cf871024b073856","slug":"mental-illnesses-on-the-rise-in-hilly-districts-everyone-is-in-the-grip-of-general-depression-disasters-in-deh-2026-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ी जिलों में बढ़ रहे मनोरोगी: सामान्य डिप्रेशन की चपेट में हर शख्स, आपदा, जानवरों के हमलों से जीवन नर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ी जिलों में बढ़ रहे मनोरोगी: सामान्य डिप्रेशन की चपेट में हर शख्स, आपदा, जानवरों के हमलों से जीवन नर्क
Sat, 23 May 2026 06:27 AM IST
Digvijay Singh
अंकित यादव,देहरादून
अंकित यादव,देहरादून
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 23 May 2026 06:27 AM IST
सार
प्राकृतिक आपदा, बाघ के हमले, खाई में गिरते वाहन आदि घटनाएं तो लोगों के अवसाद का प्रत्यक्ष कारण बन ही रहीं हैं साथ ही न दिखने वाली विपरीत परिस्थितियां भी मानसिक रोग की वजह बन रहीं हैं।
विज्ञापन
वीरान पड़े घर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पहाड़ की जिन वादियों में दुनिया सुकून तलाशने पहुंचती है वहां के बाशिंदों के लिए वही वादियां अब खौफ और बेबसी की वजह बन चुकी हैं। यह विरोधाभास ही है कि जो शांत फिजाएं पर्यटकों का मन लुभाती हैं वे वहां के निवासियों को खालीपन के अंधेरे और मानसिक बीमारियों के जाल में धकेल रही हैं। पहाड़ के लोगों का मन टटोलने वाले मनोवैज्ञानिकों की मानें तो यहां रहने वाला लगभग हर व्यक्ति सामान्य अवसाद से जूझ रहा है।
विज्ञापन
प्राकृतिक आपदा, बाघ के हमले, खाई में गिरते वाहन आदि घटनाएं तो लोगों के अवसाद का प्रत्यक्ष कारण बन ही रहीं हैं साथ ही न दिखने वाली विपरीत परिस्थितियां भी मानसिक रोग की वजह बन रहीं हैं। इसकी वजह से लोग सोमाटाइजेशन विकार, पीटीएसडी, सिजोफ्रेनिया, बाईपोलर डिसॉर्डर, साइकोसिस और डिमेंशिया की चपेट में आ रहे हैं। डर के साये में जी रहे इन इक्का-दुक्का लोगों के घरों में अब परिंदों की चहचहाहट ही बची है। वीरान पड़े घर की दहलीज पर बैठी वो बुजुर्ग आंखें किसी परिचित या अपरिचित को अपनी ओर आते देख चमक उठती हैं। गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली आदि पहाड़ी जिलों के दूरस्थ गांवों में ऐसे कई मामले हैं।
विज्ञापन
गोली से ज्यादा डॉक्टर साहब की बोली असरदार :
पौड़ी के चैलूसैंण में तैनात चिकित्सक डॉ. आशीष गोसाईं के मुताबिक मनोरोग से जूझ रहे करीब 25 लोग उनके पास हर रोज पहुंचते हैं। इनमें से 10 से 12 लोग ऐसे होते हैं जो अकेलेपन से जूझते हैं। वे कहते हैं कि डॉक्टर साहब दवाई बाद में देना पहले बात कर लो। वे अपने परिवार और घरों के पुराने किस्से डॉक्टर के साथ साझा कर अपने मन को हल्का करते हैं।
विज्ञापन
आपदा में बेटा और घर दोनों गए
उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में अगस्त 2025 में आई आपदा ने कामेश्वरी देवी की दुनिया उजाड़ दी। वह कहती हैं, आपदा ने मुझसे मेरा घर तो छीना ही मेरा बेटा भी हमेशा के लिए दूर कर दिया। अब मैं अपने जीजा के घर पर रहती हूं। रात को किसी भी समय नींद टूट जाती है। मस्तिष्क में हमेशा तनाव रहता है। रक्तचाप बढ़ने-घटने की भी परेशानी है। इस तरह की मनोस्थिति को विशेषज्ञ पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर नाम दे रहे हैं। उस इलाके से पीटीएसडी के कई मरीज पहुंच रहे हैं।
घरों के आसपास दबे हैं शव, डर में गुजर रहा जीवन
धराली में आपदा के बाद 70 परिवार में से सिर्फ पांच-छह परिवार ही बचे हैं। आपदा में गांव के ही आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा बड़ीसंख्या में वहां के होटलों में काम करने वालों और पर्यटकों की भी मौत हुई थी। गांव वालों का मानना है कई शव उनके घर के आसपास मौजूद मलबे में अब तक दबे हैं। ग्रामीण पूरणा देवी, परमानंद, शूरवीर समेत वहां रहने वाले सभी लोगों का दावा है कि उनके घरों के आसपास मलबे में कई शव दबे हैं।
पड़ोसी छोड़कर चले गए अब सिर्फ हम बचे हैं
पौड़ी जिले के तकल्लां गांव में दो लोगों का सिर्फ एक ही परिवार बचा है। इसमें विमला देवी और उनका बेटा शांति प्रसाद है। विमला बताती हैं कि पूरा गांव खाली है। चार बजे के बाद बाघ आंगन तक पहुंच जाते हैं। अकेलेपन से घबराहट रहती है।
मानसिक रोग को शारीरिक बीमारी के रूप में बता रहे
पौड़ी के श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में तैनात वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. मोहित सैनी कहते हैं कि पहाड़ पर ज्यादातर लोग विपरीत हालात की वजह से मनोरोग की चपेट में आते हैं। हर महीने 25 से अधिक मरीज ऐसे भी आते हैं जो मनोरोगी के साथ अन्य मर्ज से परेशान हैं।
हर माह इतने मनोरोगी पहुंचते हैं
उत्तरकाशी जिला चिकित्सालय : 120
टिहरी जिला चिकित्सालय : 250
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज (रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के भी मरीज) : 750