फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   MDDA will spend the revenue earned from compounding on the development of green area

Dehradun News: कंपाउंडिंग से अर्जित राजस्व को हरित क्षेत्र के विकास पर खर्च करेगा एमडीडीए

Sat, 13 Apr 2024 03:34 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2024 03:34 AM IST
विज्ञापन
MDDA will spend the revenue earned from compounding on the development of green area
देहरादून। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से ओटीएस स्कीम के जरिये भवन स्वामियों से जो शुल्क एकत्र किया जाएगा, उसके 75 प्रतिशत हिस्से का उपयोग हरित क्षेत्र के विकास, पथ प्रकाश व्यवस्था व पार्किंग व्यवस्था विकसित करने में किया जाएगा। जबकि, 25 प्रतिशत राजस्व पर्वतीय जनपद के नवसृजित प्राधिकरणों को जाएगा।
विज्ञापन

एमडीडीए क्षेत्र में एक अप्रैल से 30 सितंबर 2024 तक के लिए ओटीएस स्कीम लागू हुई है। इस स्कीम में अवैध निर्माण को शर्तों एवं नियमाें के तहत शुल्क जमाकर वैध कराया जा सकेगा। इससे अर्जित होने वाले राजस्व का 200 करोड़ का अनुमान लगाया गया है। इस अर्जित राजस्व को शहर के विभिन्न हिस्सों में हरित क्षेत्र पर खर्च किया जाएगा। इसके तहत पौधरोपण और पार्क आदि के निर्माण किए जाएंगे। इसके अलावा पथ प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग निर्माण पर भी जोर होगा। इन तीनों कार्यों के अलावा किसी अन्य कार्य पर यह रकम खर्च करनी आवश्यक हुई तो इसके लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। स्कीम के तहत मिलने वाले राजस्व में 25 प्रतिशत हिस्सा उत्तराखंड नगर एवं आवास विकास प्राधिकरण को हस्तगत किया जाएगा। यहां से यह रकम पर्वतीय जनपद के नवसृजित प्राधिकरणों के कार्मिकों को वेतन आदि के भुगतान के लिए दी जाएगी। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि स्कीम के तहत अर्जित राजस्व को हरित क्षेत्र, पथ प्रकाश व्यवस्था एवं पार्किंग आदि में खर्च किया जाएगा।
विज्ञापन

------------

चिकित्सकीय संस्थानों को भी मानकों में मिलेगी छूट
आवासीय क्षेत्रों में नर्सिंग होम, क्लीनिक, ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर एवं चाइल्ड केयर आदि को नियमित अथवा वैध कराए जाने के लिए ओटीएस स्कीम में रास्ते को लेकर मानकों में छूट दी है। जारी शासनादेश के अनुसार उक्त प्रतिष्ठानों तक पहुंचने के लिए मार्ग की चौड़ाई छह मीटर से 15 मीटर के बीच होनी चाहिए। इनमें क्लीनिक के लिए पहुंच मार्ग की चौड़ाई छह मीटर जबकि 5000 वर्ग मीटर के हास्पिटल तक पहुंचने के लिए मार्ग की चौड़ाई 15 मीटर होनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी छूट दी गई है किसी अस्पताल तक पहुंचने के लिए यदि दो मार्ग हैं तो दोनों मार्गों का 80 प्रतिशत हिस्से को मानक में शामिल कर लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed