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गरीबों को कर्ज देने को तैयार नहीं थे सरकारी बैंक

Wed, 09 Oct 2013 12:28 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 09 Oct 2013 12:28 PM IST
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MDDA association with private banks

सरकारी बैंकों ने दुर्बल आय वर्ग (गरीबों) को कर्ज देने में रुचि नहीं दिखाई तो एमडीडीए ने आईएसबीटी आवासीय योजना में निजी बैंकों का सहयोग लिया।

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निजी बैंक तैयार थे
इस योजना के लिए एमडीडीए ने सभी सरकारी बैंकों से बात की थी। इनके प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग भी लिया लेकिन गरीबों को फ्लैट खरीदने के लिए कर्ज देने को तैयार नहीं हुए, जबिक निजी बैंक तैयार थे।
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सबसे पहले आईसीआईसीआई बैंक ने लिखित में सहमति दी। इसके बाद एचडीएफसी, एक्सिस और आईडीबीआई बैंक आगे आए।

एमडीडीए शहर के सभी बैंकों की एक बैठक जून माह में बुलाई थी। इसमें बैंक आफ बड़ौदा, एसबीआई, पीएनबी सहित तमाम निजी और सरकारी बैंक के प्रतिनिधि शामिल हुए।

एमडीडीए ने रखी थी शर्त
एमडीडीए ने शर्त रखी थी कि जो भी बैंक दुर्बल आय वर्ग के लोगों को फ्लैट खरीदने के लिए ऋण देंगे, उन्हीं को फॉर्म बेचने के लिए अवसर दिया जाएगा।

इस पर सभी सरकारी बैंकों ने हाथ खड़े कर दिए। एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि सरकारी बैंकों के हाथ खड़ा करने के बाद निजी बैंकों को फार्म बेचने का मौका दिया गया। सरकारी बैंक केवल अल्प मध्य आय वर्ग और मध्य वर्ग में रुचि दिखा रहे थे।
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बैंकों ने प्रकाशित कराए फॉर्म
एमडीडीए फ्लैट के लिए फॉर्म का प्रकाशन बैंकों ने ही किया है। इसका शुल्क 570 रुपए रखा गया है। शुल्क एमडीडीए के खाते में जमा कराया जाएगा। बैंक प्रकाशन शुल्क नहीं लेंगे।

बैंकों को कैसे होगा लाभ
फ्लैट खरीदने के इच्छुक व्यक्ति को फॉर्म जमा कराने के दौरान फ्लैट की कीमत की 10 फीसदी रकम बैंकों में जमा करानी है। यह रकम फ्लैटों की लाटरी निकलने तक बैंकों के पास रहेगी। बैंक इस रकम पर कोई ब्याज नहीं देगा। जब तक फ्लैटों की लाटरी नहीं निकलेगी तब तक बैंक इस रकम का इस्तेमाल करेगा।

ईडब्ल्यूएस को लेकर एमडीडीए से बात नहीं बन पाई। वैसे अन्य को लेकर बैंक लोन देने के लिए तैयार है। इसके लिए मार्केटिंग भी की जाएगी।
- जैदी, BOB

शुरूआती दौर में एप्रोच किया गया था, लेकिन एमडीडीए केवल उसी बैंक को फार्म बेचने की बात कर रहा था जो ईडब्ल्यूएस श्रेणी को लोन दे। इसको लेकर आपत्ति थी।
- राजेंद्र जोशी, सेंट्रल बैंक

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