Haridwar: भारी विरोध के बीच में हटाई मजार, छतों पर चढ़े लोगों को पुलिस ने नीचे उतारा, छावनी में बदला इलाका
हरिद्वार ज्वालापुर में मजार हटाए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष व्यक्त किया।
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ज्वालापुर के आर्यनगर चौक के पास बनी मजार को शुक्रवार को प्रशासन ने भारी हंगामे के बीच जेसीबी से तोड़ दिया। जबकि सिंहद्वार के पास बने मंदिर को भी ध्वस्त कर दिया गया। मजार तोड़ने की कार्रवाई का मुस्लिम समाज के लोगों ने विरोध करते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि, कार्रवाई से पहले क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, जबकि यातायात को भी आर्यनगर चौक से डायवर्ट कर दिया था।
दरअसल आर्य नगर चौक के समीप चंदन वाले बाबा की मजार पर यह कार्रवाई हुई। निगम का दावा है कि यह मजार सरकारी भूमि पर बनी है। जिसे हटाने के लिए नगर निगम ने दो मई को नोटिस जारी किया था। शनिवार को दोपहर एसडीएम पूरण सिंह राणा, नगर आयुक्त दयानंद सरस्वती, एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई से पहले सड़क के दोनाें तरफ बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही बंद कर दी गई।
इधर कार्रवाई की सूचना पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौके पर जुट गए और कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी की। अधिकारियों के समझाने के बाद लोग शांत हुए। मजार हटाने के साथ ही यहां दुकानों के बाहर टिन शेड डालकर किए गए अतिक्रमण को भी ध्वस्त किया गया।
फ्लाईओवर के नीचे बने मंदिर पर भी कार्रवाई
इधर, सिंहद्वार फ्लाईओवर के नीचे बनाए गए मंदिर पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। कुछ समय पहले ही फ्लाईओवर के नीचे अतिक्रमण कर इस मंदिर का निर्माण किया गया था। इसके नीचे तहखाना भी बनाया गया था। जिसके चलते निगम प्रशासन नोटिस भी जारी किया गया था। प्रशासन की चेतावनी के बाद मंदिर में रखी प्रतिमा को पहले ही हटा लिया गया था। कार्रवाई के दौरान यहां भी भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि इस कार्रवाई का किसी ने कोई विरोध नहीं किया।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
हरिद्वार। एसडीएम पूरन सिंह राणा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मजार और मंदिर हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई से पहले डीएम और एसएसपी ने सभी पक्षों को सुना। इससे पूर्व लालजीवाला क्षेत्र में 7 हिंदू धार्मिक संरचनाओं एवं श्यामपुर क्षेत्र में 6 मजारों को ध्वस्त किया गया था।
प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
मजार तोड़ने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नगर निगम के नोटिस के बाद मामला हाईकोर्ट में लंबित है। सोमवार को इस पर सुनवाई होनी थी। लोगों ने दावा किया कि मजार वक्फ बोर्ड में दर्ज थी। उत्तर प्रदेश शासन के सर्वे में भी यह मजार दर्ज थी। विरोध करने वालों में नईम कुरैशी, सुहेल अख्तर, जमशेद खान, शादाब कुरैशी, मुकर्रम अंसारी, अतहर अंसारी, हारून खान, डॉ. मेहरबान आदि मौजूद रहे।
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मीडियाकर्मियों को भी रोका
मजार और मंदिर तोड़ने के दौरान पुलिस प्रशासन ने खासा सतर्कता बरती। खासकर, आर्य नगर क्षेत्र में मजार के आसपास की दुकानों को बंद करवा दिया था। बैरिकेडिंग कर यातायात को आर्यनगर चौक से डायवर्ट कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया। मीडियाकर्मियों को भी रोक दिया था। फोन से वीडियो और फोटोग्राफी करने पर भी रोक थी।