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मयूख ने सीएम को याद दिलाए पुराने दिन
अनूप वाजपेयी / अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 03 Oct 2014 09:53 AM IST
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स्वीकृत विकास कार्यों में ढिलाई को लेकर पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत गुरुवार सुबह आमरण अनशन पर बैठे। दिन भर उन्हें मनाने का सिलसिला चलता रहा।
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महर से कई दौर की वार्ता
आखिरकार रात 9.30 बजे करीब थरकोट झील और तय स्कूलों के लिए स्टाफ एवं धन की स्वीकृति के बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया। इससे पूर्व सरकार के दूत के रूप में पहुंचे संसदीय सचिव हेमेश खर्कवाल, मनोज तिवारी और अपर सचिव शैलेश बगौली ने महर से कई दौर की वार्ता की।
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विधायक के धरने को कांग्रेस के तमाम संगठनों का व्यापक समर्थन मिला। उनके आंदोलन में शिरकत करने के लिए जिलेभर से लोग जिला मुख्यालय पहुंचे थे। विधायक महर ने कहा है कि वह विकास के लिए कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं।
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गुरुवार को सुबह 9.18 बजे विधायक मयूख महर समर्थकों के साथ गांधी चौक पहुंचे और गांधी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद भारी नारेबाजी के बीच अनशन पर बैठ गए। उनके साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य तिलकराज जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल लोहिया भी अनशन पर बैठे हैं। कुछ देर में वहां समर्थकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
इतिहास की तरह राजनीति भी खुद को दोहराती है। नारायण दत्त तिवारी सरकार के समय मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुलकर पार्टी के भीतर मजबूत विपक्ष की वकालत की थी। वहीं, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बतौर विधायक विधानसभा के भीतर ही अपनी सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला था।
अनशन को गलत नहीं ठहराया
अब वैसा ही हरीश रावत और किशोर उपाध्याय को भी देखना पड़ा। मजे की बात यह कि प्रदेश अध्यक्ष ने मयूख महर के अनशन को गलत भी नहीं ठहराया। पार्टी और सरकार मयूख महर के आमरण अनशन को बुधवार तक धमकी तक सीमित मान रही थी।
हालांकि सरकार की ओर से उन तमाम योजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है जो मयूख की मांगों में शामिल थीं। जब मयूख अपने समर्थकों के साथ आमरण अनशन पर बैठे तो सरकार और पार्टी उन्हें राजनैतिक दबाव से अधिक भावनात्मक रूप से मनाने में जुटी थी।
मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने इसका जिम्मा विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को सौंपा था। कुंजवाल ने मयूख से बात भी की। एक समय था जब प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के खिलाफ विधानसभा के भीतर सीधा मोर्चा खोला था।
उस समय रावत ने भी किशोर का साथ दिया था। मीडिया में उनका यह बयान कि दोस्ताना विपक्ष को देखते हुए पार्टी के भीतर मजबूत विपक्ष आवश्यक है काफी चर्चित रहा था। पार्टी में बहुगुणा खेमे के कुछ विधायक लगातार मुख्यमंत्री का विरोध करते आ रहे हैं लेकिन अपनों का पराया होना अधिक परेशान कर रहा है।
सीएम खेमे को इस बात भी चिंता है कि चूंकि सीएम धारचूला से विधायक हैं और पिथौरागढ़ में सरकार के कामकाज को लेकर खराब माहौल बनना कतई ठीक नहीं है।
ये उनका संकल्प है इसमें मैं कुछ नहीं कहूंगा। मुझसे जो हो सकता था उनके लिए किया। आगे भी जो कर सकूंगा करूंगा।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
वे संवेदनशील हैं। इसे सरकार के खिलाफ चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। मैं इसे कुछ गलत नहीं मानता हूं। लेकिन विरोध का तरीका मर्यादित जरूर होना चाहिए। उनकी अधिकतर मांगें मान ली गई हैं।
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष