रुड़की: शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगाने को लेकर बवाल, मेयर-विधायक आमने-सामने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद्रशेखर चौक पर शहीद की प्रतिमा लगाने को लेकर मेयर यशपाल राणा और विधायक प्रदीप बत्रा फिर आमने सामने हैं। हाल ही में विधायक ने विधायक निधि से लाखों रुपये खर्च कर प्रतिमा को चंद कदम शिफ्ट कर दिया था।
इसके लिए यातायात सुगम होने का हवाला दिया गया था, लेकिन मेयर ने निगम की ओर से एनओसी न लेने का हवाला देते हुए विधायक के निर्माण को तुड़वा दिया है। साथ ही पुराने स्थल पर प्रतिमा रखवाने का काम शुरू करवा दिया। शांतिभंग की आशंका पर मौके पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने फिलहाल काम रुकवा दिया है।
सिविल लाइंस क्षेत्र में दशकों से स्थापित शहीद चंद्रशेखर की प्रतिमा स्थल को लेकर राजनीति गरमाने लग गई है। इसको लेकर मेयर और विधायक आमने-सामने हैं। पहले भी दोनों एक-दूसरे को पटखनी देने को नए-नए दांव आजमाते रहे हैं। अब शहीद स्थल चंद्रशेखर चौक दोनों की राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा बनता नजर आ रहा है।
दशकों से लगी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को विधायक प्रदीप बत्रा ने करीब 20 दिन पहले चंद कदम दूर शिफ्ट करवा दी थी। इससे मेयर यशपाल राणा और उनके समर्थकों में नाराजगी छाई हुई थी। अब प्रतिमा पुराने स्थल पर लगाने के लिए मेयर ने 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। जाहिर है कि यह राशि नगर निगम के खाते से निकाली जाएगी।
शहीद की प्रतिमा हटाना उचित नहीं : मेयर
बृहस्पतिवार को नगर निगम की टीम और जेसीबी के साथ मेयर यशपाल राणा चंद्रशेखर चौक पर पहुुंचे और प्रतिमा को पुराने स्थल पर स्थापित करने के लिए जेसीबी से खुदाई करवाने लगे। इसकी भनक विधायक प्रदीप बत्रा को लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी।
सूचना पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने शांतिभंग होने की आशंका पर काम रुकवा दिया। प्रतिमा स्थापित करने को चल रही मेयर-विधायक की जंग को स्थानीय लोगों ने घटिया राजनीति करार दिया है। लोगों का कहना जनता के लाखों रुपये बरबाद कर शहर के जनप्रतिनिधि राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, जो उचित नहीं है।
\मेयर यशपाल राणा का कहना है कि चंद्रशेखर चौक से शहीद की प्रतिमा इधर-उधर नहीं की जा सकती। इसके अलावा विधायक ने बिना नगर निगम के एनओसी लिए रातोंरात प्रतिमा शिफ्ट करवा दी। जबकि प्रतिमा स्थल के सुंदरीकरण के लिए नगर निगम की ओर से पहले वर्कआर्डर जारी किया था। किसी भी हाल में प्रतिमा पुरानी जगह स्थापित की जाएगी। जरूरत पड़ी तो इसके लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।